
Wednesday, February 01, 2012
ब्लू फिल्म बनाकर लूट रहा था आबरू

Wednesday, January 25, 2012
इंटरनेशनल डॉन पुलिस के हत्थे चढ़ा

ये हैं भोपाल के 'इलेक्ट्रॉनिक' चोर

पत्नी को बेचने की कोशिश
मनोज राठौर
कोटरा में रहने वाली 25 वर्षीय मोना (परिवर्तित नाम) की इसी साल जुलाई महीनें में उसके परिजन ने धूम-धूम से होशंगाबाद रोड स्थित चिनार फॉरच्यूर निवासी रामनरेश भार्गव के बेटे जैमिनी भार्गव से की थी। मोना की शादी में उसके परिजन ने लाखों रुपए खर्चा किया और दहेज में जैमिनी की हर मांग पूरी की। जैमिनी कई सालों से आॅस्ट्रेलिया में रह रहा था।शादी के करीब चार दिन बाद ही जैमिनी मोना को घर पर छोड़कर आॅस्ट्रेलिया चला गया। उसने जाते समय मोना से कहा था कि वह कुछ दिनों बाद ही उसे भी आॅस्ट्रेलिया बुला लेगा। हालांकि, महीनों बीतने के बाद न ही जैमिनी का फोन आया और न ही उसने कभी इंटरनेट पर पत्नी की बातों का जबाव दिया। मोना पति से बात करने की कोशिश करती, लेकिन वह हर बार उससे कन्नी काट लेता। इधर, मोना के ससुर रामनरेश, सास पुष्पा और ननद प्रियंका उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगे। उसने दहेज का विरोध भी किया, लेकिन ससुराल वालों के आगे उसकी एक नहीं चल पाई। इससे तंग आकर उसने किसी तरह पति जैमिनी से संपर्क किया। एक-दो बार तो जैमिनी उसे टरकाता रहा, लेकिन मोना के सख्त रवैए के आगे उसकी एक नहीं चली और उसने मन मारकर 25 अक्टूबर 2011को उसे आॅस्टेÑलिया बुला लिया। वहां एयरपोर्ट पर मोना पति के आने का इंतजार करती रहीं, लेकिन वह तीन घंटे तक नहीं आया। लंबा इंतजार करने के बाद जैमिनी एयरपोर्ट पहुंचा और मोना को एक टैक्सी में बैठाकर खुद थोड़ी देर में आने का कहकर दूसरी टैक्सी में बैठकर कहीं चला गया। उधर, टैक्सी वाले ने आॅस्टेÑलिया के अनजान स्थान पर मोना का उतार दिया और वहां से चला गया। मोना जिस स्थान पर खड़ी थी, वहां अवैध धंधा होता था। उस पर कई संदिग्ध लोग भी नजर रखे हुए थे। सभी मोना को देखने के बाद आपस में बातचीत कर खुद योजना बना रहे थे। लोगों की संदिग्ध गतिविधियों को देख मोना ने जैमिनी को फोन लगाया, लेकिन उसने उसका फोन रिसीव नहीं किया। घंटों परेशान होने के बाद उसने एक बार फिर पति को फोन लगाया, तो उसने मोबाइल फोन बंद कर लिया। बेचारी कहीं जा भी नहीं सकती थी, क्योंकि उसका आॅस्ट्रेलिया में कोई परिचित नहीं था। सो, उसने अपने साथ हुई घटना की जानकारी भोपाल में फोन से परिजन को दी। इस पर उसके पिता ने आॅस्ट्रेलिया में रहने वाले एक परिचित से किसी तरह संपर्क किया और बेटी के फंसे होने की जानकारी दी। इसके बाद उनका परिचित मोना के पास पहुंचे और वे उसे आॅस्टेÑलिया के एक थाने में ले गए, जहां पुलिस ने उसकी मदद करते हुए उसे किसी तरह भोपाल पहुंचाया।
रेड लाइट एरिया में छोड़ा: जैमिनी ने मोना को आॅस्ट्रेलिया के रेड लाइन एरिया में छोड़ा था। वहां जिस्मफरोशी का धंधा चलता था। वहां की संदिग्ध गतिविधियों को देखकर मोना सबकुछ अच्छी तरीके से समझ गई थी। इसके चलते ही उसने उस स्थान में रहने वाली एक चाइनीस परिवार से संपर्क किया। पहले तो चाइनीस परिवार ने उसे कोई भाव नहीं दिया और उसे संदिग्ध नजर से देखने लगे, लेकिन मोना ने अपनी परेशानी उनके सामने रखी, तो उन्होंने उसकी मदद की। उन्होंने मोना को बताया कि वह जिस स्थान पर खड़ी है, वहां जिस्म फरोशी का धंधा चलता है। यहां रोजाना नई-नई लड़कियों की खरीद-फरोख्त की जाती है। मोना ने उन्हें जैमिनी का नाम बताया, तो चाइनीस परिवार ने कहा कि तुम गलत आदमी के चक्कर में फंस गई है। जैमिनी इस एरिए में अक्सर आता-जाता रहता है। उसने तुम्हें किसी को बेच दिया होगा, जहां से जल्दी से निकल जाओं। वरना तुम्हारे साथ कोई अनहोनी हो सकती है। इससे डरी मोना ने तत्काल परिजन से संपर्क किया और उसकी मदद के लिए आॅस्ट्रेलिया में रहने वाले उसके परिचित आ गए। आॅस्ट्रेलिया से मोना 29 2011को भोपाल पहुंची और आरोपी पति, ससुर, साल व ननद पर दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया।
घटना के बाद से ससुराल पक्ष गायब: मोना के रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस की एक टीम ने आरोपी ससुराल वालों के घर पर दबिश दी, लेकिन उनका पता नहीं चला। जैमिनी के पड़ोसियों ने बताया कि उसका पूरा परिवार कुछ दिनों पहले ही घर पर ताला लगाकर कहीं भाग गए। मोना ने पुलिस पर भी आरोप लगाए। उसका आरोप है कि पुलिस की एक टीम ने उसके ससुराल वाले के एक रिश्तेदार के घर पर दबिश दी, लेकिन उन्होंने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। उसने आरोपियों के विदेश भागजाने की आशंका भी जाहिर की थी।
Sunday, January 22, 2012
कच्ची उम्र में प्यार...अंजाम मौत

बिजनेस के लिए बने बैंक लुटेरे

फरारी में पत्नी की हत्या
17 नवंबर 2011 को भोपाल रेलवे स्टेशन पर जीआरपी रोजाना की तरफ यात्रियों की चेकिंग व्यवस्था में व्यस्त थी। इस दौरान उन्होंने एक संदिग्ध युवक को हिरासत में ले लिया। वह बिना किसी काम के रेलवे स्टेशन पर मौजूद था। उसके पास न ही यात्रा का टिकत और न ही प्लेटफार्म टिकट था। प्रारंभिक पूछताछ में वह आनाकानी करने लगा, लेकिन सख्ती से उसकी तलाशी ली गई, तो उसके पास से एक कट्टा और तीन जिंदा कारतूस मिले। इसके बाद जीआरपी के जवान उसे उठाकर थाने लेकर आ गए। जीआरपी की पूछताछ में उसने बताया कि उसका नाम मनोहर सिंह पुत्र रामदास कुशवाह है और वह ललितपुर स्थित तालबेट का रहने वाला है। उसका रिकार्ड खंगाला गया, तो जीआरपी के रोंगटे खड़े हो गए। जीआरपी को पता चला कि आठ महीने पहले जमीनी विवाद को लेकर मनोहर का झगड़ा पड़ोसी रमेश कुशवाह से हो गया। विवाद बढ़ने पर उसने, उसके पिता रामदास, भाई राजेश, ब्रजेश, अनोखी लाल सहित छह लोगों के साथ मिलकर रमेश से मारपीट की और उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के कुछ दिनों के बाद स्थानीय पुलिस ने मनोहर के एक साथी को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि मनोहर अपने पिता, पत्नी और भाईयों के साथ फरार हो गया।
पुणे में काट रहा था फरारी: मनोहर पुलिस की नजरों से बचने के लिए इधर-उधर छुपने लगा। वे पिता, पत्नी और भाईयों के साथ कई शहरों में रहा, लेकिन उसे कुछ समय पहले पुणे में स्थाई ठिकाना मिल गया। वे अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर मजदूरी करने लगा। पुणे में उसका काम ठीक-ठाक चल रहा था। मोहल्ले उसकी अच्छी पहचान हो गई थी और उसे सभी लोग जानने भी लगे। मनोहर स्थायी रूप से पुणे में जम गया और कभी-कभी चोरी-छुपे अपने स्थानीय गांव होकर भी आ जाता था। उसके पुणे में ठिकाने का पता किसी को नहीं था। उधर, स्थानीय पुलिस भी उसके हत्या के मामले को ठंडे बस्ते में डाल चुकी थी। इसलिए की पत्नी की हत्या: मनोहर के लिए पुणे फरारी काटने का सबसे बढ़िया स्थान साबित हुआ। वह जिस मोहल्ले में रहता था, वहां उसकी अच्छी-खासी चलने लगी और सभी उसे जानने भी लगे। हालांकि, उसकी पत्नी की एक गलती ने उसकी पोल खोलकर रख दी। हुआ यूं कि एक दिन मनोहर अपने पिता और भाईयों के साथ मजदूरी पर निकल गया। घर पर उसकी पत्नी अकेली थी, तभी उसका झगड़ा पड़ोसे से हो गया। उनके बीच बात इतनी बड़ी की, उसकी पत्नी ने मोहल्ले में अपनी धाक जमाने के लिए सबके सामने पति मनोहर द्वारा गांव में की गई रमेश की हत्या की पोल खोल दी। शाम को मनोहर घर पहुंचा, तो सभी मोहल्ले वाले उसे शक की निगाहों से देखकर देने लगे। इस पर उसे संदेह हुआ और उसने पत्नी से पूछा कि आज सभी मुझे शक की निगाहों से क्यों देख रहे हैं। पहले तो उसकी पत्नी लंबे समय तक चुप रही, लेकिन बाद में उसने पड़ोसी से हुए झगड़े की बात उसे बता दी। इसके बाद क्या था। मनोहर का खून खोल गया और उसने पत्नी की हत्या करने की योजना बनाई। उसे डर था कि यदि पुलिस को ये बात पता चल गई, तो वे और उसके पिता व भाई पकड़ा जाएंगे। इसके चलते ही उसने अपनी पत्नी का गला दबाया और उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने पत्नी की लाश को पत्थर से बांधकर एक कुएं में फेंक दी। पत्नी की हत्या के बाद वह अपने परिवार के साथ दूसरे ठिकाने के लिए पुणे से निकल गया।
पिता और भाई भी हुए गिरफ्तार: जीआरपी की गिरफ्त में आए मनोहर को छुड़ाने के लिए उसके पिता रामदास और भाई थाने पहुंचे थे। वहां पड़ोसी की हत्या की पोल खुलने पर जीआरपी ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया।
बुरी नजर रखने पर किया घिनौना अपराध

Friday, January 20, 2012
हसीन चालबाज पिंकी...

पत्नी के इशारे पर करता था चोरी
हबीबगंज सीएसपी राजेश सिंह भदौरिया 25 नवंबर 2011 को आॅफिस में बैठे हुए थे। इस दौरान उन्हें एक मुखबिर ने फोन पर बताया कि साईं बोर्ड 11 नंबर स्टॉप के पास पुराने कम्प्यूटर और मोबाइल फोन बेचने की फिराक में दो युवक घूम रहे है। इस पर भदौरिया ने बीना वक्त गवाए पुलिस की एक टीम तैयार की और उसे मौके पर रवाना कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों युवकों को दबोच लिया। एक युवक भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस के घेरे से वह बच नहीं सका। उनके पास से कम्प्यूटर और मोबाइल फोन भी बरामद किए। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों युवक खुद को कबाड़ी बता रहे थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह पुराने कम्प्यूटर लोगों से कबाड़े में खरीदकर लाए हैं, जिससे वह बेचना चाहते हैं। संदेह होने पर पुलिस ने उनसे सख्ती से पूछताछ की, तो वे दोनों टूट गए। उनकी पहचान अरेरा कॉलोनी, झुग्गीबस्ती निवासी सलमान खान पिता छुट्टन खान (20) और देवा जाधव पिता भीखा जाधव (23) के रूप में हुई। पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने शहर के शिवाजी नगर, रविशंकर मार्केट, बघीरा अपार्टमेंट, अरेरा कॉलोनी सहित मिसरोद क्षेत्र में अभी तक चोरी की नौ वारदात की हैं। सलमान और देवा अपने साथी अस्सू खान, रहमान, परमपाल, शंकर और जीतू उर्फ जितेंद्र के साथ वारदात को अंजाम देते थे। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने जाल बीछाकर हबीबगंज क्षेत्र से अस्सू को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को रहमान, परमपाल, शंकर और जीतू की तलाश है। आरोपियों ने साढ़े तीन लाख रुपए कीमत के कम्प्यूटर मॉनीटर, सीपीयू, प्रिंटर, घाड़ियां इंवेर्टर की बैटरी, सोने-चांदी के जेवर सहित अन्य सामान बरामद किया है।
रैकी के बाद वारदात को अंजाम: गिरोह का सरगना देवा जाधव है। वह कई सालों से चोरी की वारदात को अंजाम दे रहा था। उसकी पत्नी को उसकी हर एक जानकारी रहती थी। उसे पता रहता था कि उसका पति आज कहां चोरी करेगा। दरअसल, पूछताछ में देवा ने बताया कि उसकी पत्नी अरेरा कॉलोनी क्षेत्र के कई घरों में साफ-सफाई का काम करती है। इस दौरान वह सूने घरों को जानकारी अपने पति देवा को देती थी। पत्नी के निशानदेही पर आरोपी देवा अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम देता था। इसके अलावा देवा के साथी भी शहर में दिनभर रेकी करने का काम करते थे। इस दौरान उनके निशाने पर ऐसे मकान होते थे, जहां काफी दिनों से साफ-सफाई नहीं हुई हो और वहां आंगन में सूखे पत्ते पड़े हों। आरोपी उस घर की दो बार रेकी करते थे और मौका पाकर वारदात को अंजाम देते थे।
अय्याशी में उड़ाते थे पैसे: अधिकांश आरोपियों की पत्नी घरों में साफ-सफाई करने का काम करती हैं। उनके पति उन्हें दो वक्त की रोटी भी कमाकर नहीं देते हैं। देवा और उसके साथी चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद सामान को औने-पौने दामों में ठिकाने लगा देता था। इसके बाद वह आपस में थोड़े-होत रूपए बांट लेते थे और बाकी को शराब और अय्याशी में उड़ाते थे। वे कुछ पैसे घर में देते थे, लेकिन इससे उनके महीनेभर का राशन भी नहीं आता था। गिरोह के सदस्य खोलेंगे राजआरोपियों से पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि फरार रहमान, परमपाल, शंकर और जीतू का मिलकर एक अन्य गिरोह का संचालन करते हैं। वे कभी-कभी देवा और सलीम के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि फरार आरोपियों ने शहर में लूट जैसी वारदात को अंजाम भी दिया है। फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस ने तीन टीमें बनाई हैं, जो भोपाल सहित आसपास के जिलों में उनकी तलाश कर रही है।
महिला पुलिसकर्मी से बलात्कार
मनोज राठौर
प्रोफेसर कॉलोनी स्थित पुलिस लाइन में रहने वाली 29 वर्षीय मोना (परिवर्तित नाम) ईओडब्ल्यू में सिपाही है। वह मूल रूप से जबलपुर की रहने वाली है, लेकिन पोस्टिंग के कारण पिछले दो साल से भोपाल में रह रही है। वह अपने-घर आती-जाती रहती थी। हालांकि, 2011 से डेढ़ साल उनकी दोस्त शाहजहांनाबाद थाने में पदस्थ सिपाही जितेंद्र तिवारी से हो गई। यह दोस्ती कुछ ही दिनों में नजदीकियां में तब्दील हो गई और जितेंद्र ने मोना को अपने प्यार के जाल में फंसा लिया। उसने डेढ़ साल तक मोना को अपनी हवस का शिकार बनाया और बाद में उसका ट्रांसफर कटनी हो गया। इसके बाद मोना ने उससे संपर्क किया, तो उसने बातचीत करना बंद कर दी और उससे किनारा करने लगा। मोना उससे शादी की बात कही, तो वह आनाकानी करने लगा और उससे हर बार शादी करने का झूठा आश्वसन देता रहा। एक दिन मोना ने उससे परिवार के सदस्यों से संपर्क कर शादी की बात रखी। इस पर जितेंद्र और उसके परिजन ने शादी करने से साफ-साफ मना कर दिया। ऐसी स्थिति में मोना के पास एफआईआर दर्ज कराने के अलावा ओर कोई चारा नहीं था। सो, उसने जितेंद्र के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया।
ऐसा शुरू हुई कहानी: जितेंद्र और मोना कई सालों से एक-दूसरे को जानते हैं। दोनों ही जबलपुर के रहने वाले हैं। पुलिस में आने के बाद उनकी दोस्ती ओर ज्यादा गहरी हो गई। उधर, संजोग की बात थी कि दोनों की पोस्टिंग भोपाल में हो गई। मोना और जितेंद्र एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे, इसलिए वे भोपाल में एक-दूसरे घर आते-जाते रहते थे। कई बार तो दोनों एक साथ बाहर खाना भी खाते थे। मगर, यह दोस्ती कब प्यार में बदल गई। यह बात मोना और जितेंद्र को पता ही नहीं चली। फिर क्या था, दोनों दिखने में खुबसूरत थे और जवान भी थे। वे जिंदगी की इस दौरान से गुजर रहे थे, जहां किसी का साथ होना जरूरी रहता है। जितेंद्र ने प्यार के बहाने मोना को शादी का झांसा दिया। उसने मोना से वादा किया कि वह शादी करेगा, तो सिर्फ उसी से करेगा। वे पुलिस में रहने के दौरान अच्छे से बच्चों की परवरिश कर सकेंगे, लेकिन यह वादा सिर्फ सफेद झूठ के सिवाए कुछ नहीं था। वह इसी वादे की दम पर मोना के करीब आ गया और उसने करीब डेढ़ साल तक उसे अपनी हवस का शिकार बनाया।
दोस्ती तोड़ना चाहता था: जैसे-जैसे जितेंद्र और मोना के बीच एक-साथ रहने का समय बढ़ता जा रहा था, वैसे-वैसे जितेंद्र उससे दूरियां बनाने लगा था। उसका मोना से दिल भरा गया था और वह उससे दोस्ती तोड़ना चाहता था। मगर, मोना कहा मानने वाली थी। उसके सिर पर तो शादी का भूत सवार था। उसने जितेंद्र पर शादी करने का प्रेशर बनाया, तो उसने किसी तरह अपना ट्रांसफर कटनी करवा लिया। उसे कटनी में कुछ दिन हुए थे, तभी मोना ने उससे शादी के संबंध में फाइनल जबाव मांगा। इस पर जितेंद्र प्रेशर में आकर शादी के लिए तैयार हो गया, लेकिन यह प्रेशर थोड़े दिनों का ही था। इसके बाद मोना ने जितेंद्र से संपर्क किया, तो उसने उसका फोन नहीं उठाया। इस पर मजबूर होकर मोना जबलपुर स्थित जितेंद्र के घर चली गई और वहां उसके परिजन से शादी की बात कही। हालांकि, परिजन शादी का नाम सुनकर भड़क गए और उससे वहां से चलता कर दिया।
जबलपुर से भोपाल आई डायरी: जितेंद्र के घर से जाने के बाद मोना चार नवंबर को जबलपुर के आधारताल थाने पहुंची और जितेंद्र के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया। घटनास्थल प्रोफेसर कॉलोनी होने के कारण आधारताल पुलिस ने जीरो पर मामला दर्ज कर केस डायरी को श्यामला हिल्स थाने में भेज दिया। मोना ने रिपोर्ट में लिखवाया कि डेढ़ साल पहले उसकी दोस्ती शाहजहांनाबाद थाने में पदस्थ सिपाही जितेंद्र तिवारी से हुई थी। इसके बाद जितेंद्र उसके घर आने-जाने लगा। मोना ने बताया कि जितेंद्र ने उसे शादी का झांसा दिया और करीब 18 महीनों तक उसके साथ ज्यादती की। वह कुछ दिनों पहले ही जबलपुर स्थित जितेंद्र के घर शादी की बात करने के लिए पहुंची, तो उसके परिजन ने शादी करने से इनकार कर दिया। इसके चलते ही उसने जितेंद्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।
...सौतेली मां की हत्या
मनोज राठौर
मोहल्ले वालों के रोज-रोज के तानों से आकर अमन ने अपनी सौतेली मां की जान ले ली। उसे मां के चरित्र पर शक था, जिसके चलते ही लोग उसपर ताने कसते थे। उसने मां को घर में आने के लिए मना भी किया था, लेकिन वह सप्ताहभर बाद घर में आ आई और अमन ने उसकी चाकू से गोदकर हत्या कर दी।शर्मा कॉलोनी, शाहजहांनाबाद निवासी प्रदीप घौंसले (40) प्राइवेट काम करते हैं। उनके तीन बेटे हैं, जिसमें सबसे छोटा बच्ची उर्फ हरीश उर्फ अमन (17) है। बाकी के दो बेटे भी मेहनत-मजदूरी करते हैं। अमन भी कभी-कभार काम पर जाता था। उसका अधिकांश समय कॉलोनी में रहने वाले दोस्तों के साथ गुजराता था। उसकी मां की करीब नौ साल पहले मौत हो गई थी। इसके बाद प्रदीप ने बेटों की परवरिश के लिए शाहजहांनाबाद निवासी लक्ष्मी बाई (35) को पत्नी बनाकर रख लिया। कुछ सालों तक उनके बीच सबकुछ ठीक चला, लेकिन बाद में उनके बीच अनबन शुरू हो गई। लक्ष्मीबाई के कारण बाप-बेटों में आए दिन झगड़ा होने लगा। मगर, यह झगड़ा 27 अक्टूबर 2011 की दोपहर साढ़े तीन बजे हमेशा के लिए समाप्त हो गया। हुआ यूं कि दोपहर 3.30 बजे लक्ष्मीबाई अपनी बहन के घर से सौतेल पति प्रदीप के घर पहुंची। वहां किसी बात को लेकर उसका प्रदीप से झगड़ा हो गया। इस दौरान अमन सौतेली मां लक्ष्मीबाई को घर में दाखिल नहीं होने नहीं दे रहा था। इधर, बात बढ़ने पर प्रदीप और लक्ष्मीबाई के बीच मारपीट शुरू हो गई और प्रदीप ने पत्नी को जमीन पर पटक दिया। इसी दौरान अमन घर में गया और चाकू लेकर आ गया। इससे पहले की प्रदीप कुछ समझ पाता, उसने सौतेली मां के पेट पर ताबड़ तोड़ वार कर दिए। इसमें लक्ष्मी बाई घायल होकर सड़क पर गिर गई और घटना से घबराए बाप-बेटे फरार हो गए। कॉलोनी के लोगों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने लक्ष्मीबाई को 108 एंबुलेंस से हमीदिया अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इसलिए की हत्या: पुलिस की गिरफ्त में आए अमन ने पूछताछ के दौरान बताया कि कॉलोनी के लोग और दोस्त उसे ताना देते थे कि उसके मां का चरित्र ठीक नहीं है। दोपहर के समय उनके घर गैर मर्दाें का आना-जाना लगा रहता है। लोगों ने यह भी कहा कि इससे कॉलोनी का माहौल खराब हो रहा है। इतना ही नहीं इसके चलते ही अमन के दो भाईयों की शादी भी नहीं हो रही थी और रिश्तेदार उन पर ताने कसते थे। रोजाना के तानों से परेशान आकर अमन ने अपनी मां की करतूतों को आंखों से देख भी लिया। इसके बाद उसने निर्णय कि वह अपने घर में सौतेली मां लक्ष्मीबाई को नहीं आने देगाा। घटना से छह-साल दिन पहले अमन और उसकी सौतेले मां लक्ष्मीबाई के बीच झगड़ा हुआ। इस दौरान अमन ने उसे डांट कर भगा दिया और वापस घर में नहीं आने के धमकी दी। इस पर लक्ष्मीबाई भी सप्ताहभर शाहजहांनाबाद में रहने वाली बहन के घर में रही। मगर, उसने आखिरकार घर आने की गलती कर दी और अमन ने उसकी जान ले ली।
होती थी मारपीट: घर में छोटा होने के कारण लक्ष्मीबाई अमन से आए दिन मारपीट करती थी। कॉलोनी के लोगों ने घटना वाले दिन अमन को जो रूप देखा, उससे देखकर वे भी दंग रह गए। प्रदीप और लक्ष्मीबाई के बीच झगड़ा चल रहा था, उस समय अमन घर के दरवाजे पर खड़ा था। उसकी मां ने उसे भी गाली देना शुरू की, तो वह इसका विरोध करने के लिए मां के पास पहुंचा। वहां लक्ष्मीबाई ने उसके गाल पर दो तमाचे चढ़ दिया। इससे नाराज अमन गाली-गलौच करते हुए घर में गया और चाकू लेकर आ गया।
Thursday, January 19, 2012
धोखे से बनाई अश्लील सीडी


छात्रों ले लूटा नशे में लूट
मनोज राठौर
ई-5/1, अरेरा कॉलोनी में रहने वाले बिल्डर अनिल क्षत्रपाल की कंस्टक्शन कंपनी है। उनकी कंपनी में ईश्वर साल्वे नामक युवक काम करता है। ईश्वर उनका बफादार कर्मचारियों में से एक है, जो कई सालों से उनके साथ काम कर रहा है।साल्वे तीन अगस्त 2011 की रात करीब साढ़े आठ बजे कंपनी की पिकअप वैन (एमपी 04 जीए 1275) एमपी नगर से रिपयेर कराकर घर की तरफ लौट रहा था। इस दौरान अरेरा कॉलोनी चौराहे पर बाइक सवार तीन युवकों ने उनकी वैन को रोक लिया। साल्वे ने समझा की युवकों को कोई मदद चाहिए है, इसलिए वह बिना सोचे-समझे वैन से नीचे उतर गए। मगर, यह गलती उन पर भारी पड़ी। युवकों ने उन्हें वैन में जबरिया बैठाया और एक युवक वैन को ड्राइव करने लगा। इसके बाद उन्होंने साल्वे की चलती वैन में पिटाई की और जहांगीराबाद स्थित कब्रस्तान के पास साल्वे को नीचे उतारकर उनसे सात सौ रुपए नकदी व एक मोबाइल फोन छीन लिया। इसके बाद तीनों युवक वैन को लेकर फरार हो गए। तीनों आरोपी नशे की हालत में थे। उन्होंने नशे में पिकअप वैन को लूट लिया।
चंगुल से निकलकर थाने पहुंचा साल्वे: आरोपियों के चंगुल से निकलने के बाद साल्वे एमपी नगर थाने पहुंचा। वहां उसने पुलिस को अपने साथ हुई लूट की घटना के बारे में बताया। इसके बाद एमपी नगर पुलिस ने लूट की घटना को शहर के अन्य थानों को वायरलैस सेट के माध्यम से बताया। इधर, सूचना मिलते ही पुलिस ने नाकेबंदी कर आरोपियों को पकड़ लिया। आरोपी की पहचान रिवेरा टाउन निवासी शैलेंद्र सिंह यादव (21), भदभदा रोड निवासी धीरज त्रिपाठी(21) और कोलार रोड निवासी दीपक शर्मा (22) के रूप में हुई।
ऐसे धराए आरोपी: हबीबगंज पुलिस को पता चला कि आरोपी होशंगाबाद की ओर भागने की कोशिश कर रहे थे। इस पर पुलिस की एक टीम ने उनका पीछा किया। इस दौरान बासेवनिया की ओर से पुलिस की गाड़ी को अपनी ओर आता देख आरोपियों ने वैन को हबीबगंज नाके की ओर मोड़ दिया। हालांकि, आरोपियों की किस्मत खराब थी, क्योंकि फाटक लगा हुआ था और ट्रेन आने वाली थी। इसके चलते उन्होंने फाटक के पास वैन खड़ी की और रेलवे पटरी को क्रास कर हबीबगंज रेलवे स्टेशन की ओर पैदल भागने लगे। इस दौरान पटरी को पार करते समय ट्रेन आ गई और वे ट्रेन की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए। उधर, पुलिस ने फाटक के दूसरे तरह सख्त घेराबंदी कर दी थी। हबीबगंज रेलवे स्टेशन की तरफ जैसे ही आरोपी भागे, वैसे ही पुलिस ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। अपनी ओर पुलिस को आता देख आरोपी अरेरा कॉलोनी की ओर भागने लगे। इस दौरान पुलिस ने आरोपी शैलेंद्र को दबोच लिया था, जबकि दीपक ई-3 अरेरा कॉलोनी निवासी सक्सेना के घर की छत पर चढ़ गया और धीरज गर्ल्स हॉस्टल परिसर में चला गया। पुलिस ने उन्हें भी घेराबंदी कर दबोच लिया था। पुलिस ने आरोपियों वैन और नकदी बरामद कर ली।
छात्र थे आरोपी: तीनों आरोपी का परिवारिक स्थिति ठीक थी। सभी खाते-पीते घर के थे। इतना ही नहीं तीनों आरोपी पढ़ाई भी कर रहे थे। इनमें धीरज और शैलेंद्र इंजीनियर के छात्र हैं, जबकि दीपक एक निजी कॉलेज से बैचलर डिग्री कर रहा है। पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों आरोपियों ने हबीबगंज थाने में साल्वे से माफी भी मांगी और उनकों गाड़ी लूटने का हजार्ना देने की बात भी कही, लेकिन साल्वे ने उन्हें माफ नहीं किया।
शराब के लिए पहले लूट, बाद में हत्या
मनोज राठौर
अशोका गार्डन थाने में नए-नए आए थाना प्रभारी आरआर पाटीदार छह जुलाई 2011की रात 11.00 बजे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे। इस बीच थाने से उनके पास फोन आया कि औद्योगिकी क्षेत्र स्थित एवन ब्रेड फैक्टरी के पास कुछ लोगों ने एक युवक पर चाकू से हमला कर दिया है। घायल युवक को 108 एंबुलेंस से हमीदिया अस्पताल भेज दिया गया है। इतना सुनने के बाद पाटीदार बिना वक्त गवाए घटना स्थल पर पहुंच गए।उन्होंने घटना स्थल पर घायल युवक की जानकारी एकत्रित करनी चाही, तो उनके पास दोबारा एक सिपाही का फोन आया। उसने बताया कि साहब, घायल युवक की मौत हो गई है। अब यह मामला हत्या के प्रयास का नहीं, बल्कि हत्या का हो गया है। यह जानकारी मिलते ही पाटीदार ने पुलिस की एक टीम बनाई और मृतक की शिनाख्त करने के लिए कहा। टीआई का निर्देश का पालन करते हुए टीम एवन ब्रेड फैक्टरी पहुंची। वहां टीम ने कर्मचारियों और अधिकारियों को मृतक के हुलिए की जानकारी दी। पूछताछ के दौरान कर्मचारियों ने बताया कि उक्त हुलिए का युवक उनकी फैक्टरी में काम करता है। इसके बाद पुलिस के साथ कुछ कर्मचारी घटना स्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने मृतक की साइकल को देखकर उसकी पहचान फैक्टरी में काम करने वाले सुभाष कॉलोनी निवासी आसिफ उर्फ इस्माइल पुत्र सुलेमान (22) के रूप में की। पुलिस ने मृतक की शिनाख्त होने पर राहत की सांस तो ली, लेकिन अब पुलिस के लिए हत्यारों का सुराग लगाने सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके चलते पुलिस की अलग-अलग टीमों ने आसिफ के पड़ोसी, दोस्त और फैक्टरी में काम करने वाले लोगों से पूछताछ की। सप्ताहभर चली पूछताछ के बाद भी पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची।
ऐसे की हत्या: घटना वाले दिन हुआ यूं कि आसिफ ठीक 11 बजे फैक्टरी से काम निपटाने के बाद साइकल से घर लौट रहा था। इस दौरान फैक्टरी से थोड़ी दूरी पर उसकी साइकल चार युवकों ने रोक ली। चारों युवक नशे की हालत में धुत थे। उन्होंने आसिफ से रुपए की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इस बीच आसिफ ने कुछ समय तक आरोपियों का सामना भी किया, लेकिन एक युवक ने आसिफ की शर्ट से उसके ही हाथ-पैर बांध दिए और उसकी पेंट की जेब से करीब सात सौ रुपए, दो मोबाइल फोन निकाला। इसके बाद आरोपियों ने उसके पेट में चाकू घोंप दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी भाग निकले और कलारी पर जाकर शराब खरीद ली।
क्राइम ब्रांच को मिला हत्यारों का सुराग: एएसपी एसएम वर्मा ने बताया कि 21 अगस्त को एक मुखबिर ने क्राइम ब्रांच को सूचना दी कि आसिफ की हत्या करने वाले आरोपी अशोका गार्डन स्थित सेमरा गेट के पास घूम रहे हैं। इस पर उन्होंने क्राइम ब्रांच और अशोका गार्डन पुलिस की एक संयुक्त टीम का गठन किया। उनके मार्ग दर्शन में उक्त टीम ने मौके पर जाकर घेराबंदी कर तीन आरोपियों को दबोच लिया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी आनाकानी करने लगे, लेकिन सख्ती बरतने पर उन्होंने आसिफ से लूट और उसकी हत्या करना स्वीकार की। आरोपी की पहचान देशराज उर्फ भैया कुशवाह (27), सोनू शाक्य (23) और बुंदेल शाक्य (18) के रूप में हुई। सभी आरोपी सेमरा गेट, बाबू कॉलोनी के रहने वाले हैं। आरोपियों का एक साथी राजपाल फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
शराब के लिए हत्या: घटना वाले दिन चारों आरोपियों ने देशी कलारी पर जमकर शराब पी। हालांकि, इस दौरान आरोपियों ने ओर अधिक शराब खरीदने के लिए अपनी-अपनी जेब टटोली, तो किसी के पास एक रुपया भी नहीं निकला। इस पर चारों ने रुपए के लिए लूट करने की योजना बनाई। वे नशे की हालत में थे और उनके सिर पर रुपए हासिल करने के लिए सिर्फ लूटपाट करने का जुनून सवार था। इस पर चारों युवक घूमते-फिरते हुए औद्योगिकी क्षेत्र स्थित एवन ब्रेड फैक्टरी के पास पहुंचे और अंधरे में किसी के आने का इंतजार करने लगे। इस दौरान आसिफ वहां से जैसे ही गुजरा, तो आरोपियों ने उसे रोक लिया। विरोध करने पर आरोपियों ने आसिफ के हाथ-पैर उसकी शर्ट से बांध दिए और लूटपाट करने के बाद उसकी चाकू से नृशंस हत्या कर दी। आरोपियों पर इक्कादुक्का मारपीट और अड़ीबाजी के मामले ही दर्ज हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया कि शराब के लिए रुपए नहीं मिलने पर उन्होंने आसिफ से जबरिया लूटपाट की और विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी।
प्रेम प्रसंग से जोड़कर देखा मामला: अशोका गार्डन थाना पुलिस की एक टीम ने आसिफ के घर की तलाशी ली, तो वहां उन्हें एक युवती का फोटो मिला। फोटो देखने के बाद पुलिस मामले को प्रेम प्रसंग से जोड़कर देखने रही थी, लेकिन युवती का सुराग नहीं मिलने पर पुलिस की जांच फिर से ठंडे बस्ते में चली गई। पुलिस सप्ताहभर पहले जहां खड़ी थी, उसने खुद को वहीं पाया।
Wednesday, January 18, 2012
आर्थिक तंगी ने बनाया लुटेरा
बरखेड़ा पठानी निवासी गोपीलाल मेहरा शाहजहांनाबाद स्थित रजिस्ट्रार आॅफिस में नौकरी करते हैं। वह रोजाना की तरह 15 जून 2011 को आॅफिस से पंजीयन शुल्क के 15 लाख 46 हजार 325 रुपए लेकर सुल्तानिया रोड स्थित स्टेट बैंक की शाखा में जमा करने के लिए जा रहे थे। बेनजीर गेट के सामने बाइक सवार तीन बदमाशों ने उन पर क्रिकेट बैट से जानलेवा हमला कर बाइक लूट ली। बदमाशों ने शाहजहांनाबाद क्षेत्र में बाइक को लावारिस हालत में पटक दिया और उसकी डिग्गी में रखे 15 लाख 46 हजार 325 निकाल लिए। इस मामले में एएसपी संतोष सिंह गौर ने गोपीलाल और उसके करीबियों पर शक दायर किया था। इसके चलते पुलिस ने उनके बेटे सहित अन्य लोगों से पूछताछ भी की, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। इसके बाद पुलिस की शक की सुई रजिस्ट्रार आॅफिस के कर्मचारियों पर आकर रूक गई। एएसपी गौर ने सभी कर्मचारियों का रिकार्ड निकाला और उसकी जांच पड़ताल की। पड़ताल में उन्हें पता चला कि स्थायी कर्मचारियों के अलावा भी कुछ लोग कभी-कभी आॅफिस में काम करने के लिए आते हैं। इस पर एएसपी ने अस्थायी कर्मचारियों की लिस्ट तैयार की और उन पर नजर रखने के लिए पुलिस की एक टीम बनाई। इस टीम ने सप्ताहभर के अंदर एएसपी को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी लगाकर दी। यह जानकारी आरोपियों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त थी। इसके बाद क्या था, एएसपी ने बिना वक्त गवांए लुटेरों को दबोच लिया।
आर्थिक तंगी के चलते लूट- पुलिस से ठोस सबूतों के आधार पर कबीटपुरा निवासी याकूब खान, उसके भांजे नासिर और जहांगीराबाद में रहने वाले दोस्त उबेश, शहजाद व आमिर को दबोच लिया। आरोपी याकूब और नासिर रजिस्ट्रार कार्यालय में बाइंडिंग का काम करते थे। इस दौरान उनका परिचय गोपीलाल से हो गया। उनका बाइंडिंग की कमाई से ठीक तरीके से गुजारा नहीं हो पा रहा था। वे आर्थिक तंगी से गुज रहे थे। इसके चलते ही याकूब ने गोपीलाल के साथ लूट करने की योजना बनाई। उसे पता था कि गोपीलाल रोजाना लाखों रुपए लेकर बैंक में जाम करना चाहता था। उसने अपनी लूट की योजाना में भांजे नासिर, दोस्त उबेश, शहजाद और आमिर को शामिल किया।
ऐसी की लूट- याकूब की योजना के मुताबिक उबेश, शहजाद और आमिर बाइक से बेनजरी गेट पहुंचे और पता पहुंचने के बहाने गोपीलाल को रोक लिया। जैसे ही वह रूके, वैसे ही आरोपियों ने क्रिकेट बैट से उन पर जानलेवा हमला कर दिया। इसके बाद आरोपी भागकर उवेश के घर पहुंचे और लूट की राशि को कचरे में छुपा दिया। इधर, घायल गोपीलाल को एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान होश आया। उन्होंने पुलिस को बताया था कि यदि आरोपी उनके सामने आ जाएगें, तो वह उन्हें पहचान लेंगे। घटना के चार दिन के बाद याकूब ने 307000, नासिर ने 407000, उबेश ने 407000, आमिर ने 407000 और शहजाद ने 18325 रुपए आपस में बांट लिए। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से लूट के रुपए से खरीदी गई एक बाइक और 12 लाख रुपए नकदी बरामद कर लिए ।बाइक खरीदी- उवेश ने लूट के रुपए में से एक लाख सात हजार रुपए की एक बाइक खरीद ली थी। वह नई बाइक को लेकर मोहल्ले में गया, तो कुछ लोगों पर उसे संदेह हुआ। इसकी जानकारी पुलिस को मिली, तो उस पर नजर रखी जाने लगी। इसके बाद पर्याप्त साक्ष्य एकत्र कर पुलिस ने उसे दबोच लिया।
पहचान के डर से दोस्तों का सहारा- याकूब ने पहचाने जाने की डर से अपने दोस्त उबेश, आमिर और शहजाद का सहारा लिया। उसे पता था कि यदि वह लूट की वारदात को अंजाम देगा, तो उसे गोपीलाल पहचान लेगा। इसके चलते वह भांजे नासिर के साथ बेनजीर गेट से थोड़ी दूरी पर छुप गया और गोपीलाल के आने पर साथियों को इशारा कर दिया।
छेड़छाड़ करने पर की हत्या
दोस्त की बहन के साथ छेड़छाड़ करना एक युवक को उस समय महंगा पड़ गया, जब उसने शराब के नशे में उसकी बहन के बारे में अपशब्द कह दिए। फिर क्या था, दोस्त ने दो सथियों के साथ मिलकर चाकू से उसकी गला रेतकर हत्या कर दी। अभी आरोपी सेंट्रल जेल में सजा काट रहे हैं...
मनोज राठौर
रोजाना की तरह टीटी नगर स्थित शास्त्री नगर निवासी मनोरमा पत्नी स्व. बीएल शर्मा (50) 17 जून 2011 की सुबह एमएलबी कॉलेज चली गर्इं। वह कॉलेज में बतौर लैब टेक्नीशियन हैं। घर पर उनका इकलौता बेटा जीत शर्मा (21) था, जबकि उनकी बेटी बीबीए की पढ़ाई कर रही है। वह शुरू से शास्त्री नगर स्थित अपने दादा-दादी के पास रहती थी। इस दौरान मनोरमा भले ही लैब में विद्यार्थियों के साथ काम कर रही हों, लेकिन उनका मन घर पर लगा हुआ था। वह रोजाना की तरह कॉलेज से ससुराल न जाकर शाम छह बजे सीधे घर चली आईं। वह घर के दृश्य को देखकर थोड़े देर के लिए चौंक गई। उन्होंने देखा कि बेटा जीत, उसके दोस्त सोनू और अरविंद बरामदा बगीचे के फर्श की धुलाई कर रहे है। मनोरमा ने जीत से पूछा कि यह साफ-सफाई क्यों की जा रही है। इस पर जीत चौंक गया और उसने तोतली जवान से कहा कि कुछ नहीं फर्श गंदा हो रहा था, इसलिए उसे साफ कर दिया। इसके बाद जीत साथियों के साथ कन्नी काट कर घर से बाहर चला गया। अगले दिन उसने दादा-दादी को अपने घर के गैरेज की चाबी दी और रफूचक्कर हो गया।
आखिर क्या हुआ था उस दिन
17 जून की सुबह मनोरमा के कॉलेज जाने के बाद जीत ने दोस्त दिनेश मीणा, सोनू और अरविंद को घर पर बुलाया। घर पर बैठकर उन्होंने जमकर शराब पी। इस दौरान जीत और दिनेश के बीच कहासुनी हो गई। विवाद इतना बड़ा की, दिनेश ने गुस्से में जीत के हाथ और पैर पर बीयर की बोतल मार दी। इस पर आग बबुला हुए जीत ने सोनू और अरविंद के साथ मिलकर नशे में धुत दिनेश की चाकू से गोंदकर हत्या कर दी। उन्होंने जब तक दिनेश पर हमला किया, तब तक उसकी जान नहीं निकल गई। पहले उन्होंने लाश को घर के बाहर किसी सूनसान इलाके में ठिकाने की योजना बनाई, लेकिन कॉलोनी में आवाजाही तेज होने के कारण उनकी योजना फेल हो गई। इसके बाद जीत ने सोनू और अरविंद की सहायत से लाश को गैरेज में रखे लोहे के ड्रम में छुपा दिया था।
इसलिए की हत्या
घटना के अगले दिन जीत गैरेज की चाबी दादा-दादी को देकर दोस्त सोनू के साथ ग्वालियर आ गया था। वह छह दिनों तक ग्वालियर में रूके, लेकिन मुखबिर की सूचना पर क्राइम स्क्वॉड ने दोनों आरोपियों को दबोच लिया। प्रारंभिक पूछताछ में वे आनाकानी करने लगे, लेकिन एएसपी अमित सांघी के द्वारा बरती गई सख्ती के बाद उन्होनें दिनेश की हत्या करना स्वीकार की। जीत ने पुलिस को बताया कि दिनेश कॉलेज आते-जाते उसकी बहन को रास्ते में रोककर छेड़ता था। यह बात उसके पता चली, तो उसने दिनेश को सबक सिखाने की ठान ली। घटना वाले दिन भी घर पर शराब पीने के दौरान दिनेश ने उसकी बहन के बारे में अपशब्द कह दिए थे। उधर, जीत पहले से दिनेश से नाराज चल रहा था। फिर क्या था, जीत का दिनेश से विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर उसने सोनू और अरविंद के साथ मिलकर दिनेश की हत्या कर दी।
दिनेश की चाय की दुकान
गीताजंलि निवासी दिनेश (23) पीएंडटी स्थित भाई प्रकाश के साथ चाय की दुकान संभालता था। वह गत 17 जून को घर नहीं लौटा था, उसके परिजन ने कमला नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसे आखरी बार प्रकाश ने जीत, सोनू और उसके भाई अरविंद के साथ देखा था। इसके चलते वह उसे ढूंढते हुए जीत के घर पहुंचा। वहां पहले से भीड़ लगी हुई थी, क्योंकि पुलिस ने पड़ोसियों को बदबू आने की शिकायत पर गैरेज में ड्रम के अंदर रखी दिनेश की लाश बरामद कर ली थी। भाई प्रकाश ने बताया कि जीत, सोनू और दिनेश शराब पीने के आदी थी। साथ में शराब पीने के बाद पूर्व में भी उनके बीच कई बार झगड़ा हो चुका था।
जीत कर चुका है, आत्महत्या का प्रयास
टीटी नगर पुलिस के अनुसार जीत आवारा किस्म का लड़का था, पढ़ाई में भी उसका मन नहीं लगाता था। दसवीं में तीन मर्तबा फेल हो चुका है, इस बार भी उसे सप्लिमेंट्री आई थी। वह अक्सर शराब पीकर चौराहे पर लोगों से विवाद किया करता था। बीते साल उसने फिनाइल पीकर आत्महत्या की कोशिश की थी।
प्रेमी निकला दगाबाज

Thursday, January 12, 2012
अवैध संबंध ने ली जान
