Friday, March 15, 2013

नंद किशोर को मृत्युदंड की सजा


राजधानी भोपाल में दुष्कर्म के बाद हत्या करने के आरोपी नंद किशोर को जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुषमा खोसला ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है मासूम बच्ची का शव प्रदेश के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता के आवास के करीब क्षत-विक्षत हालत में बरामद हुआ था राजधानी की बाणगंगा क्षेत्र की बस्ती में रहने वाले मजदूर परिवार की बेटी का शव गृहमंत्री गुप्ता के घर के पास चार फरवरी को मिला था. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बालिका के साथ दुष्कर्म और फिर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई इस मामले की सुनवाई 12 मार्च को पूरी हुई और सरकारी अधिवक्ता  ने आरोपी को फांसी की सजा दिए जाने की मांग की
14 मार्च को जिला न्यायाधीश खोसला ने बालिका से दुष्कर्म व हत्या को जघन्य और विरला कृत्य मानते हुए आरोपी नंदकिशोर को फांसी की सजा सुनाई है पुलिस ने बालिका का शव मिलने के दो दिन बाद ही ऑटो चालक नंद किशोर को बालिका के भाई की गवाही पर गिरफ्तार कर लिया था पुलिस ने मामले की 21 दिन में जांच पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल कर दिया एक मार्च से रोजाना सुनवाई शुरू हुई जिसमें 33 गवाहों ने गवाही दी काजल के अपहरण के आरोप में सात साल, दुष्कर्म के आरोप में उम्रकैद, लैंगिक अपराधों में बच्चों का संरक्षण अधिनियम के आरोप में उम्र कैद और साढ़े तीन हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई है। सरकारी वकील राजेंद्र गिरि ने बताया कि यह प्रदेश में पहला मामला है जब 9 दिनों की सुनवाई में फैसला हो गया है।
मनोज राठौर
  

Wednesday, February 01, 2012

ब्लू फिल्म बनाकर लूट रहा था आबरू

पड़ोसी से मदद मांगना सरोज को उस समय महंगा पड़ गया, जब उसने उसकी आबरू लूटी और उसकी ब्लू सीडी बना ली। इसके बाद वह सीडी को सार्वजनिक करने की धमकी देकर उसके शरीर का शोषण करता गया। ये सिलसिल सरोज के जहर खाने के बाद खत्म हुआ.....

मनोज राठौर

लखेरापुरा में रहने वाली 25 वर्षीय सरोज (परिवर्तित नाम) ने 23 जनवरी 2012 सुबह करीब 11 बजे जहर खा लिया। तबीयत खराब होने पर उसके पति ने उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। सही समय पर इलाज मिलने के कारण उसकी जान तो बच गई, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने इस घटना की जानकारी कोतवाली थाना पुलिस को नोट करा दी। इसके बाद क्या था, अस्पताल की सूचना पर पुलिस वहां पहुंची। पुलिस ने सरोज के बयान दर्ज किए, तो उनके होश उड़ गए। सरोज ने उन्हें अपने बयान में बताया कि ऐशबाग निवासी शादाब पुत्र मोहम्मद शारिफ खान पिछले चार सालों से उसे अपनी हवस का शिकार बना रहा है। इससे तंग आकर उसने जहर खाया है। इसके बाद पुलिस कर्मियों ने सरोज द्वारा बताए गए घटनाक्रम को वरिष्ठ अधिकारियों को बताया। वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सरोज के बयान के आधार पर शादाब पर प्रताड़ना और बलात्कार का मामला दर्ज करने के निर्देश दिए। पुलिस ने उसे गिरफ्तार भी कर लिया है।

ये है सरोज की कहानी: सरोज की आठ-नौ साल पहले शादी हुई थी। वह अपने पति और बच्चों के साथ ऐशबाग क्षेत्र में रहती थी। पति की आमदानी कम होने के कारण उनका ठीक तरीके से गुजारा नहीं हो पा रहा था। इसके चलते ही सरोज ने आर्थिक स्थिति से निपटने के लिए लोन लेने की योजना बनाई। वे लोन के पैसों से कोई व्यवसाय शुरू करने वाली थी। लोन के लिए उसने मोहल्ले में रहने वाले परिचित शोएब खान से संपर्क किया। शोएब ने सरोज की स्थिति को भांपते हुए उसका 90 हजार रुपए का लोन एचडीएफसी बैंक से पास करावा दिया। इसके बाद उसने लोन की राशि में से केवल 20 हजार रुपए सरोज को दिए और बाकी की राशि खुद खा गया। सरोज ने लोन की बाकी की राशि शोएब से वापस मांगी, तो वह आनाकानी करने लगा और उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने लगा।

पड़ोसी शादाब ने दिया झांसा: लोन के 70 हजार रुपए नहीं मिलने पर सरोज ने अपने पड़ोसी शादाब खान से मदद मांगी। शादाब ने उसके भोलेपन का फायदा उठाया और एक दिन उसे लोन की बाकी राशि दिलाने का कहकर अपने साथ एमपी नगर ले गया। उसने सरोज को एक कमरे में रूकाया और उसे कोल्डडिंÑग में नशीली दवा पिला दी। कोल्डड्रिंग पीने के बाद सरोज बेहोश हो गई। इसके बाद उसे होश आया, तो उसके शरीर पर कपड़े नहीं थे। उसने इसका विरोध किया, तो उसने धमकी दी कि मैंने तुम्हारी ब्लू सीडी बना ली है और यदि तुमने किसी को घटना के बारे में बताया, तो वह सीडी को सार्वजनिक कर देगा। ब्लू सीडी के डर के कारण उसने अपने साथ हुई घटना के बारे में पति को नहीं बताया और छोटी सी शक्ल लेकर घर चली गई।

शादाब ने पीछा नहीं छोड़ा: एमपी नगर में हुई घटना के बाद सरोज ने सोचा कि शादाब उसे फिर कभी परेशान नहीं करेगा, लेकिन ये उसकी गलतफेमी थी। इस घटना के बाद शादाब के हौंसले बुलंद हो गए। वह हर कभी सरोज के घर चला जाता और उसे सीडी सार्वजनिक करने की धमकी देता। इसी तरह उसने करीब चार सालों तक सरोज को अपनी हवस का शिकार बनाया। शादाब से पीछा छुड़ाने के लिए वह अपने पति और बच्चों के साथ लखेरापुरा स्थित एक किराए के मकान में रहने लगी। हालांकि, शादाब ने वहां भी उसका पीछा नहीं छोड़ा और उसे अवैध संबंध बनाने के लिए मजबूर करने लगा। रोज-रोज की शारीरिक प्रताड़न से तंग आकर उसने जहर खाकर खुदकुशी की कोशिश की।

मेमोरी कार्ड में मिले फोटो: अभी तक पुलिस के हाथ सरोज की अश्लील सीडी हाथ नहीं लगी है। पुलिस ने शादाब को गिरफ्तार कर उसके पास से जरूर एक मोबाइल फोन जब्त किया है। मोबाइल फोन में से मिले एक मेमोरी कार्ड में सरोज की कुछ आपत्तिजनक फोटो हैं। पुलिस मेमोरी कार्ड की जांच पड़ताल कर रही है। पुलिस ने शादाब से पूछताछ की, तो उसने उन्हें बताया कि वह खुद सरोज के जाल में फंस गया। उसने सरोज के चरित्र पर आरोप लगाए और पूरे घटनाक्रम के लिए उसे दोषी ठहराया। हालांकि, पुलिस उसकी इन बातों को झूठ मान रही है, क्योंकि शादाब की प्रताड़ना से तंग सरोज ने खुदकुशी की थी।

Wednesday, January 25, 2012

इंटरनेशनल डॉन पुलिस के हत्थे चढ़ा

मनोज राठौर

डॉन को पकड़ पाना मुश्किल ही नहीं, बल्कि ना-मुमकिन है। ये फिल्मी डायलाग इंटरनेशलन चोर बंटी उर्फ देवेंद्र सिंह पर लागू होता है, लेकिन राजधानी पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने के बाद ना-मुमकिन को भी मुमकिन कर दिया। बंटी की पहचान ही उसकी दुश्मन बनी, क्योंकि बिग-बॉस में आने के बाद उसे देशभर की जनता जानने और पहचानने लगी थी। उसने देशभर में चोरी की वारदात को अंजाम दिया और सालों तक पुलिस के हाथ नहीं आया। कई बार उसका पुलिस से आमना-सामना भी हुआ, लेकिन शातिर बंटी हर बार पुलिस की आंखों में धूल झोंकने में सफल रहा।13 2012 जनवरी की शाम करीब साढ़े पांच बजे मुखबिर ने कोतवाली पुलिस को सूचना दी कि चौकबाजार स्थित नदीम प्रेस रोड पर इंटरनेशनल चोर बंटी चोरी का सामान बेचने की फिराक में घूम रहा है। इस पर पुलिस की एक टीम बनाई गई और उसने मौके पर जाकर घेराबंदी कर उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ में उसने बताया कि वह गंगा पैलेस होटल में रुका हुआ है। तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके पास से एक लाल रंग की फाइल, ड्राइविंग लाइसेंस और चांदी के बर्तन जब्त किए। पुलिस को उसके पास से एक ड्राइविंग लायसेंस भी मिला, जिसमें उसका नाम देवेंद्र लिखा था। हालांकि, उसने पुलिस को गुमराह करते हुए खुद का नाम कैमरून निवासी नेपोलियर जीजस बताया।

नाम और चांदी ने फंसाया: बंटी के परवल में बताए गए नाम और चोरी की चांदी ने उसकी पहचान पक्की कर दी थी। इसके चलते ही वह पुलिस को गुमराह करने के बाववजूद अपने ही जाल में खुद फंस गया।10 जनवरी 2012को बंटी ने दिल्ली के न्यू फे्रंड्स कॉलोनी से एक कार चुराकर पलवल पहुंचा था। वहां वह आगरा चौक स्थित धैर्य भारद्वाज की दुकान पर चोरी की तीन किलो चांदी बेचने पहुंचा था। दुकानदार को उसने अपना नाम नेपोलियर बताया था। शक होने पर दुकानदार ने पुलिस को सूचना दे दी। लेकिन पुलिस के पहुंचने के पहले वह कार लेकर फरार हो गया। पुलिस ने शहर में नाकेबंदी की और उसे रास्ते में रोक भी लिया। हालांकि, उसने नाके पर कार नहीं रोकी, तो पुलिस वालों ने उसकी कार पर डंडे फेंक जिससे उसकी कार के कांच टूट गए। इसके बावजूद रास्ते में उसकी कार का टायर फट गया और वह कार को करीब आधा किलोमीटर तक चलाकर ले गया। इसके बाद उसने पर्वतीया कॉलोनी के पास कार को खड़ा किया और उसमें रखी करीब तीन किलो चांदी लेकर फरार हो गया। इधर, उसका पीछा कर रही पुलिस ने कार को जब्त किया। पुलिस को कार से काली कैप, जैकेट, 70 गाड़ियों की चाबी, नंबर प्लेट, महंगी शराब की बोतलें और सिगरेट बरामद की थी। वहां की पुलिस ने आरोपी पर चोरी का मामला भी दर्ज किया था।

ऐसे बना इंटरनेशन चोर: बंटी का नेटवर्क देशभर में फैला है और उससे हर शहर की पुलिस जानती है। वह मूल रूप से दिल्ली का रहने वाला है। उसके जापान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका में ठिकाने थे। नेपाल में उसके चार्ल्स शोभराज से संपर्क थे। चोरी का माल बेचने के लिए उसने नेपाल, बांग्लादेश आदि देशों में उसने एजेंट बना रखे थे। वह काली कैप व कोट पहनने का शौकीन है। बंटी के भाई बलिंद्र सिंह और पिता के मुताबिक उन्होंने पहले से ही बंटी से अपने सभी रिश्ते तोड़ रखे हैं, इसलिए उससे हमारा कोई संबंध नहीं है। बंटी की एक गर्ल फ्रेंड भी थी। 2007 में दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। उसके जेल जाने के बाद गर्ल फे्रंड ने अन्य युवक से शादी कर ली।

बंटी पर बनी फिल्म: बंटी की कारगुजारियों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसके ऊपर अभय देओल अभिनीत फिल्म ‘ओए लकी, लकी ओए’ नाम की फिल्म भी बन चुकी है। इसके लिए निर्माता ने काफी रिसर्च की थी और दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु, अहमदाबाद, चंडीगढ़, लुधियाना समेत देश के कई शहरों में बंटी का आपराधिक रिकार्ड भी खंगाला था। उधर, रियलिटी शो बिग बॉस सीजन-4 में भी वह भाग ले चुका है। उसे साइनिंग अमाउंटन के तौर पर दो लाख रुपए मिले थे। वह बिग बॉस के घर में करीब सप्ताहभर तक रहा, लेकिन खराब व्यवहार के कारण उसे निकाल दिया गया।

कुत्तों पर की थी स्टडी: बंटी ने कुत्तों पर स्टडी भी की थी। दरअसल, बड़े घरों में चोरी के दौरान इस हाईप्रोफाइल चोर का सामना अक्सर कुत्तों से हो जाता था। इससे बचने के लिए वह साथ में कुतिया का यूरिन रखता था और चोरी से पहले रुमाल में लगाकर कुत्तों के पास फेंक देता था। जैसे ही कुत्ते उस ओर आकर्षित होते थे, वह घर के अंदर दाखिल हो जाता था। इसके अलावा कुत्तों को बहलाने के लिए वह अपने साथ चाकलेट भी रखता था। यह खुलासा उसने 2002 में गिरफ्तारी के दौरान दिल्ली पुलिस की पूछताछ में किया था।

खूब कराई खातिरदारी: बंटी से पूछताछ करने में पुलिस को पसीना आया। वह पूछताछ के दौरान पुलिस से अजीबो-गरीबो बातें करता था। इसके बावजूद पुलिस ने तीन दिनों तक उसकी जमकर आव-भगत की। बंटी को पुलिस ने खाना दिया, तो उसने उसे खाने से मना कर दिया। पुलिस ने उसकी डिमांड पर उसे खाने के लिए दूध-जलेबी, सेब, संतरे और केले लाकर दिए। इतना ही नहीं उसकी फरमाइश पर उसे संतरे का जूस भी दिया गया।

फर्राटेदार अंगे्रजी बोल रहा: बंटी पुलिस से फर्राटेदार अंग्रेजी में बात कर रहा है। उससे उसकी पहचान के बारे में पूछा, तो उसने कहा कि आई एम नॉट बंटी। उससे पूछा गया कि वह बिग बॉस सीजन-चार में था, तो उसने जबाव दिया कि आई बिग बॉस का भी बॉस हूं।दिल्ली पुलिस ने लगाई मौहर: कोतवाली पुलिस की सूचना पर दिल्ली पुलिस 16 जनवरी को भोपाल पहुंची और उसने फिंगर प्रिंट के आधार पर बंटी की पहचान पर मौहर लगा दी। दिल्ली पुलिस ने उसकी पहचान तो कर ली, लेकिन अभी भी वह खुद को नेपोलियन बता रहा है। वह कभी खुद को अवतार, तो कभी खुद को क्रिसमस टी से पैदा होना बताता है। इसके अलावा वह पुलिस से कह रहा है कि उसका सात दिन पहले जन्म हुआ है और वह थाने में नहीं जापान में है।

ये हैं भोपाल के 'इलेक्ट्रॉनिक' चोर

तेज दिमाग, कम्प्यूटर का नॉलेज और महंगे शोक....। फिर गया था, अनूप सिंह बन गया चोर और उसने तैयार किया पांच सदस्यीय गिरोह। अनूप की खास बात थी कि वह गिरोह के सदस्यों के साथ सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक का सामान ही चोरी करता था। इससे ही उसे गिरोह को 'इलेक्ट्रॉनिक' चोर कहते हैं....

एमपी नगर में आईसीआईसीआई एटीएम को लूटने का मामला
मनोज राठौर

हबीबगंज के 1/30,1100 क्वार्टर निवासी अनूप सिंह के पिता सरकारी ड्राइवर हैं। उसके घर में किसी चीज की कमी नहीं है। परिजन ने सोचा था कि अनूप पढ़-लिखकर उनका नाम रोशन करेगा, लेकिन उसने स्कूल के बाद कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं की और घर पर प्ले स्टेशन खोल लिया। मगर, तीन साल पहले उसके शातिर में कुछ अलग ही चल रहा था।उसने प्ले स्टेशन सिखाने की आड़ में अपना गिरोह तैयार किया। उसने गिरोह में विश्वजीत, सईद, अनिल, शकील और हीरा ठाकुर शामिल थे। अनूप और विश्वजीत स्कूली दोस्त हैं। अनूप कई बार जेल भी जा चुका था, जहां उसकी मुलाकात गिरोह के बाकी के साथियों से हो गई। उधर, हीरा भी अनूप का परिचित है, जो कम्प्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर है। अनूप गिरोह का मास्टर माइंट था और वहीं चोरी के ठिकानों को तय करता था। वह गिरोह के सदस्यों के साथ इलेक्ट्रॉनिक दुकानों को निशाना बनाता था और वहां से इलेक्ट्रॉनिक का सामान चोरी करता था। उसने ही गिरोह के सदस्यों को अलग-अलग काम सौंपे थे, जिसमें सईद, अनिल, शकील ठोस धातुओं को काटने और विश्वजीत ताकत से से उसे तोड़ने का काम करता था। विश्वजीत बाडी बिल्डर है और जिम में ट्रेनर था। अनूप इस्टीम कार से वारदात को अंजाम देता था। अनूप कार को घटना स्थल से थोड़ी दूर पर खड़ी कर देता और सबसे पहले एटीएम बूथ में लगे कैमरे और बिजली के तार काटता था। हालांकि, उनका यह चोरी का खेल ज्यादा दिनों तक नहीं चला और वे 10 नवंबर 2011 को एक के बाद एक कर क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गए। क्राइम ब्रांच ने उनके पास से 20 लाख रुपए से ज्यादा का इलेक्ट्रॉनिक आइटम बरामद किया। इसके अलावा उनके पास से एक कार और पांच दो पहिया वाहन भी मिले, जो उन्होंने चोरी के रुपए से खरीदे थे।

ऐसे हत्थे चढ़ा अनूप: 11-12 सितंबर की दरमियानी रात एमपी नगर स्थित आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम को तोड़कर करीब सात लाख रुपए चोरी हुई थी। इस मामले में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने बोर्ड आॅफिस चौराहे पर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटैज की पड़ताल की, तो उसमें एक संदिग्ध सफेद रंग की कार नजर आई। हालांकि, ये पुलिस के लिए कोई महत्वपूर्ण सुराग नहीं था। घटना के दो महीनें बाद अचानकर क्राइम ब्रांच के मुखबिर ने सूचना दी कि वह एटीएम में चोरी करने वाले एक संदेही को जानता है। उसने क्राइम ब्रांच को पता दिया 1/30,1100 क्वार्टर, हबीबगंज निवासी अनूप सिंह। इस पर क्राइम ब्रांच की एक टीम ने अनूप की गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दिया। उधर, सादे कपड़ों में तैनात जवानों को अपने आगे-पीछे देख अनूप को शक हुआ और वह परिवार के साथ छपरा, बिहार स्थित अपने पुस्तौनी घर चला गया। इसी बीच क्राइम ब्रांच ने कुछ साक्ष्य एकत्रित कर अनूप के दोस्त जनता कॉलोनी, हबीबगंज निवासी अनिल, मीरा नगर निवासी सईद मंसूरी, नयापुरा कोलार निवासी विश्वजीत दास और ग्राम बावडिया कला शाहपुरा निवासी शकील खान को गिरफ्तार कर लिया। इसके कुछ दिनों बाद ही अनूप और उसके दोस्त हीरा को भोपाल से गिरफ्तार कर लिया गया। इस घटना का मास्टर माइंड अनूप है। उसने चार दोस्तों के साथ आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम में वारदात को अंजाम देना स्वीकार किया।

टारगेट पर इलेक्ट्रॉनिक सामान: पुलिस रिमांड के दौरान मास्टर मांइड अनूप, विश्वजीत दास, शकील खान, अनिल, सईद और हीरा ठाकुर ने पिछले दो सालों में कोलार, कमला नगर, टीटी नगर, ऐशबाग, मिसरोद, हबीबगंज, शाहपुरा, बागसेवनिया, पिपलानी और टीटी नगर में 14 चोरी की वारदात करना कबूली हैं। इससे पहले आरोपियों ने दो एटीएम मशीनों को तोड़ने का असफल प्रयास भी किया था। उनकी निशानदेही पर क्राइम ब्रांच ने श्यामला हिल्स में रहने वाले उनके दोस्त हीरा ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया। हीरा चोरी के सामान को ठिकाने लगाने का काम करता था। पुलिस ने आरोपियों से लेपटॉप, प्रिंटर, कम्प्यूटर, टीएफटी, वीडियो-स्टील कैमरें, फोटो कॉपी मशीन, एक स्कूटर, दो बाइक, मोबाइल फोन और उसकी एसेसरीज सहित 20 लाख रुपए से ज्यादा का सामान बरामद किया है। इसके अलावा पुलिस ने चोरी का सामान खरीदने वाले 11 लोगों को भी आरोपी बनाया है, जिनमें अधिकांश छात्र, साइबर कैफे संचालक और इलेक्ट्रॉनिक दुकानदार शामिल हैं।

बाइक चलाने के शौकीन: आरोपी अपने महंगे शौक को पूरा करने के लिए चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। सभी चोरी की रकम से नई-नई गाड़ियों को खरीदने और अय्याशी में उड़ाते थे। अनूप बाइक चलाने का शौकीन था और वह स्टंट भी करता था। इसके चलते अनूप सहित उसके दोस्तों ने अपने-अपने हिस्सों में राशि से चार बाइक खरीद ली थी। मोनिका शुक्ला ने बताया कि आरोपियों ने शहर में दर्जनभर से ज्यादा चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है। उनसे चोरी के माल को बरामद करने के अलावा शहर में हुई अन्य चोरी की घटनाओं के बारे में पूछताछ की जा रही है। चोरी की वारदात को अंजाम दिया है।

कुछ अलग हटकर किया: आईजी यादव ने बताया कि आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम में हुई घटना को लेकर अलग-अलग बैंकों के मैनेजरों से एक बैठक में चर्चा की गई। इस दौरान देशभर में हुई अलग-अलग बैंकों के एटीएम में लूट और चोरी की घटनाओं की जानकारी जुटाकर उसकी समीक्षा की गई। इसमें सामने आया कि ये भारत में अपने तरह की पहली वारदात है , जिसमें आरोपियों ने अपने पीछे कोई भी सबूत नहीं छोड़ा। वे कैमरे के कनेक्शन काटने के साथ-साथ एटीएम मशनी की स्टोरेज डिवाइस और रिकॉर्डिंग बाक्स तक चोरी कर ले गए। उन्हें पता था कि स्टोरेज डिवाइस का डाटा बैंक के हैड-आॅफिस में भी रिकॉर्ड होता है।

पत्नी को बेचने की कोशिश

आस्ट्रेलिया में पत्नी को बुलाकर बेचने का मामला
मनोज राठौर
कोटरा में रहने वाली 25 वर्षीय मोना (परिवर्तित नाम) की इसी साल जुलाई महीनें में उसके परिजन ने धूम-धूम से होशंगाबाद रोड स्थित चिनार फॉरच्यूर निवासी रामनरेश भार्गव के बेटे जैमिनी भार्गव से की थी। मोना की शादी में उसके परिजन ने लाखों रुपए खर्चा किया और दहेज में जैमिनी की हर मांग पूरी की। जैमिनी कई सालों से आॅस्ट्रेलिया में रह रहा था।शादी के करीब चार दिन बाद ही जैमिनी मोना को घर पर छोड़कर आॅस्ट्रेलिया चला गया। उसने जाते समय मोना से कहा था कि वह कुछ दिनों बाद ही उसे भी आॅस्ट्रेलिया बुला लेगा। हालांकि, महीनों बीतने के बाद न ही जैमिनी का फोन आया और न ही उसने कभी इंटरनेट पर पत्नी की बातों का जबाव दिया। मोना पति से बात करने की कोशिश करती, लेकिन वह हर बार उससे कन्नी काट लेता। इधर, मोना के ससुर रामनरेश, सास पुष्पा और ननद प्रियंका उसे दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगे। उसने दहेज का विरोध भी किया, लेकिन ससुराल वालों के आगे उसकी एक नहीं चल पाई। इससे तंग आकर उसने किसी तरह पति जैमिनी से संपर्क किया। एक-दो बार तो जैमिनी उसे टरकाता रहा, लेकिन मोना के सख्त रवैए के आगे उसकी एक नहीं चली और उसने मन मारकर 25 अक्टूबर 2011को उसे आॅस्टेÑलिया बुला लिया। वहां एयरपोर्ट पर मोना पति के आने का इंतजार करती रहीं, लेकिन वह तीन घंटे तक नहीं आया। लंबा इंतजार करने के बाद जैमिनी एयरपोर्ट पहुंचा और मोना को एक टैक्सी में बैठाकर खुद थोड़ी देर में आने का कहकर दूसरी टैक्सी में बैठकर कहीं चला गया। उधर, टैक्सी वाले ने आॅस्टेÑलिया के अनजान स्थान पर मोना का उतार दिया और वहां से चला गया। मोना जिस स्थान पर खड़ी थी, वहां अवैध धंधा होता था। उस पर कई संदिग्ध लोग भी नजर रखे हुए थे। सभी मोना को देखने के बाद आपस में बातचीत कर खुद योजना बना रहे थे। लोगों की संदिग्ध गतिविधियों को देख मोना ने जैमिनी को फोन लगाया, लेकिन उसने उसका फोन रिसीव नहीं किया। घंटों परेशान होने के बाद उसने एक बार फिर पति को फोन लगाया, तो उसने मोबाइल फोन बंद कर लिया। बेचारी कहीं जा भी नहीं सकती थी, क्योंकि उसका आॅस्ट्रेलिया में कोई परिचित नहीं था। सो, उसने अपने साथ हुई घटना की जानकारी भोपाल में फोन से परिजन को दी। इस पर उसके पिता ने आॅस्ट्रेलिया में रहने वाले एक परिचित से किसी तरह संपर्क किया और बेटी के फंसे होने की जानकारी दी। इसके बाद उनका परिचित मोना के पास पहुंचे और वे उसे आॅस्टेÑलिया के एक थाने में ले गए, जहां पुलिस ने उसकी मदद करते हुए उसे किसी तरह भोपाल पहुंचाया।
रेड लाइट एरिया में छोड़ा: जैमिनी ने मोना को आॅस्ट्रेलिया के रेड लाइन एरिया में छोड़ा था। वहां जिस्मफरोशी का धंधा चलता था। वहां की संदिग्ध गतिविधियों को देखकर मोना सबकुछ अच्छी तरीके से समझ गई थी। इसके चलते ही उसने उस स्थान में रहने वाली एक चाइनीस परिवार से संपर्क किया। पहले तो चाइनीस परिवार ने उसे कोई भाव नहीं दिया और उसे संदिग्ध नजर से देखने लगे, लेकिन मोना ने अपनी परेशानी उनके सामने रखी, तो उन्होंने उसकी मदद की। उन्होंने मोना को बताया कि वह जिस स्थान पर खड़ी है, वहां जिस्म फरोशी का धंधा चलता है। यहां रोजाना नई-नई लड़कियों की खरीद-फरोख्त की जाती है। मोना ने उन्हें जैमिनी का नाम बताया, तो चाइनीस परिवार ने कहा कि तुम गलत आदमी के चक्कर में फंस गई है। जैमिनी इस एरिए में अक्सर आता-जाता रहता है। उसने तुम्हें किसी को बेच दिया होगा, जहां से जल्दी से निकल जाओं। वरना तुम्हारे साथ कोई अनहोनी हो सकती है। इससे डरी मोना ने तत्काल परिजन से संपर्क किया और उसकी मदद के लिए आॅस्ट्रेलिया में रहने वाले उसके परिचित आ गए। आॅस्ट्रेलिया से मोना 29 2011को भोपाल पहुंची और आरोपी पति, ससुर, साल व ननद पर दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया।
घटना के बाद से ससुराल पक्ष गायब: मोना के रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस की एक टीम ने आरोपी ससुराल वालों के घर पर दबिश दी, लेकिन उनका पता नहीं चला। जैमिनी के पड़ोसियों ने बताया कि उसका पूरा परिवार कुछ दिनों पहले ही घर पर ताला लगाकर कहीं भाग गए। मोना ने पुलिस पर भी आरोप लगाए। उसका आरोप है कि पुलिस की एक टीम ने उसके ससुराल वाले के एक रिश्तेदार के घर पर दबिश दी, लेकिन उन्होंने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। उसने आरोपियों के विदेश भागजाने की आशंका भी जाहिर की थी।

Sunday, January 22, 2012

कच्ची उम्र में प्यार...अंजाम मौत

मनोज राठौर

कच्ची उम्र में प्यार करने का अंजाम शायद 15 वर्षीय जीत और आयूषी को पता नहीं था। उनकी यही नादानी उनकी मौत का कारण बन गई। परिजन ने उन्हें कुछ पलों के लिए जूदा क्या किया, उन्होंने मन में मौत को गले लगाने की ठान ली। जीत परिजन से अपने दोस्त से मिलने का कहकर घर से निकला और आयूषी भी बहाना बनाकर अपने चाचा के घर से बाहर आ गई। इसके बाद क्या था, दोनों ने अपने मन की सुनी और ट्रेन के सामने आकर खुदकुशी कर ली। दोनों ने कच्ची उम्र में इतना बड़ा कदम तो उठा लिया, लेकिन उनके परिजन अभी भी इस सदमें से उभर नहीं पाए हैं। वे उनकी याद करते हुए रो-पड़ते हैं।12/7 ओल्ड सुभाष नगर निवासी नंदकिशोर यादव रेलवे विभाग में लोको पायलट हैं। उनका 15 वर्षीय बेटा जीत यादव एक प्राइवेट स्कूल में 10 वीं का छात्र था। परिजन जीत को सबसे ज्यादा प्यार करते थे। वे उसकी हर जिद को पूरा करते थे। मगर, नंदकिशोर को यह पता नहीं था कि जीत की एक जिद को पूरा नहीं करने पर वह खुदकुशी जैसा इतना बड़ा कदम उठा लेगा। आखिर यही हुआ और जीत ने अपनी नाबालिग प्रेमिका के साथ ट्रेन के सामने आकर जान दे दी। दरअसल, जीत कच्ची उम्र में प्यार के मायाजाल में फंस गया था। वह पड़ोस में रहने वाली आयूषि (15) से प्यार करने लगा था। आयूषि भी 10 वीं की छात्र थी, लेकिन वह जीत के साथ नहीं पड़ती थी। आयूषि और जीत का घर पास-पास होने की वजह से उनके बीच दिनों-दिन नजदीकियां बढ़ती जा रही थी। दोनों अपने-अपने घरों के सामने खड़े होकर एक-दूसरे को निहारते थे। अलग-अलग स्कूल में पढ़ने के बावजूद उनका मिलना-जूलना कम नहीं हुआ। इस दौरान परिजन ने भी उन्हें इसलिए नहीं टोका, क्योंकि उनकी उम्र पढ़ाई करने की थी, न की प्यार करने की। मगर, धीरे-धीरे आयूषि और जीत एक-दूसरे को अपनी जाने से भी ज्यादा प्यार करने लगे थे। वे स्कूल जाने के दौरान चोरी-छुपे मिलते थे। आखिर दोनों की प्यार की कहानी मोहल्ले वालों और उनके दोस्तों से कहा छुपने वाली थी। सभी को उनके प्रेम प्रसंग के बारे में पता था। हालांकि, उनके प्रेम प्रसंग की बात उनके परिजन को पता चली, तो उन्होंने अपने-अपने बच्चों को प्यार से समझाया। मगर परिजन को पता नहीं था कि बात बहुत आगे तक पहुंच चुकी है। दोनों एक-दूसरे को देखे बिना नहीं रहते थे। एक-दो दिन तो वे परिजन के डर के कारण नहीं मिले, लेकिन बाद में उनका मिलना-जुलना शुरू हो गया।

परिजन को नगावार गुजरा: इधर, आयूषी और जीत के परिजन उन्हें बार-बार समझाइश दे रहे थे कि अभी उनकी उम्र पढ़ाई-लिखाई की है। इस उम्र में कोई प्यार नहीं करता है। बालिग होने के बाद सभी लोगों की शादी होती है। मगर, परिजन की इन बातों को उन पर कोई खास असर नहीं पड़ा। पानी जब सिर से ऊपर निकल गया, तो अपने परेशान आकर घटना से कुछ दिनों पहले आयूषी के परिजन ने उसे नेहरू नगर में रहने वाले उसके चाचा के घर छोड़ दिया। इधर, जीत के परिजन ने भी उस पर नजर रखना शुरू कर दी और उसके घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी। यह थी आखरी मुलाकात: आयूषी के नेहरू नगर जाने की बात जीत को पता चली, तो वह उससे मिलने के बहाने ढूंढने लगा। उनके बीच मुलाकात भी हुई और इसी दौरान उन्होंने एक साथ जीने और मरने की कस्म खा ली। उन्हें यह लगने लगा कि उनके परिजन उन्हें कभी भी नहीं मिलने देंगे। साथ ही बड़े होने पर उनकी शादी भी इधर-उधर कर देंगे। यह बातें मन में लेकर दोनों ने 18 अक्टूबर 2011 को एक साथ मरने की ठान ली। इसके बाद सुबह करीब 11 बजे जीत परिजन से एक दोस्त से मिलने का कहकर घर से निकाला। उधर, आयूषी भी उससे मिलने के लिए नेहरू नगर से निकल गई थी। दोनों ने ऐशबाग क्षेत्र में आखरी बार मुलाकात की और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर रात करीब 11 बजे सुभाष नगर अंडर ब्रिज के ऊपर से गुजरी रेलवे ट्रेक पर चलने लगे। उन्होंने अपनी आखरी सांस तक एक-दूसरे का हाथ नहीं छोड़ा। मगर,भोपाल रेलवे स्टेशन की तरफ से आ रही नर्मदा एक्सप्रेस ने दोनों को हमेशा-हमेशा के लिए एक-दूसरे से जूदा कर दिया। ट्रेन से टकराने के बाद दोनों के शरीर के कई हिस्से हो गए। रेलवे कर्मचारियों की सूचना के बाद मौके पर पहुंची ऐशबाग पुलिस ने जीत और आयूषी के शवों को बरामद कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेज दिया।

शादी करना चाहते थे: जीत और आयूषी के बीच करीब छह महीनों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। घर वालों का पहरा भी उन पर कोई खास असर नहीं छोड़ पाया। उन्होंने एक-दूसरे से मिलना-जुलना नहीं छोड़ा। उनके बीच दिनों-दिन नजदीकियां बढ़ती जा रहीं थी। हालांकि, उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनका छह महीनें का शादी की राह तक पहुंच जाएगा। दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे और इसी प्यार को अमर करने के लिए वे शादी भी करना चाहते थे। लेकिन नाबालिग होने की वजह से परिजन ने उनकी भावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया और उनहें अलग-अलग कर दिया।

बिजनेस के लिए बने बैंक लुटेरे

बागसेवनिया में आंध्रा बैंक लूट

दो युवकों अपना बिजनेस खोलने के लिए इतने ज्यादा पागल हो गए कि उन्होंने बागसेवनिया स्थित आंध्रा बैंक से 15 लाख रुपए लूट लिए....

मनोज राठौर

भोपाल क्राइम ब्रांच पिछले तीन महीनों से आंध्रा बैंक में हुई 15 लाख रुपए की लूट की जांच कर रही थी, लेकिन उसके हाथ कोई ठोस सबूत नहीं लगे। उसे कुछ लोगों पर शक था, लेकिन सबूत के नहीं होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं कर पाई। मगर, क्राइम ब्रांच ने हार नहीं मानी और अपनी जांच जारी रखी। एक दिन 20 दिसंबर 2011 को मुखबिर ने क्राइम ब्रांच को बताया कि बीमाकुंज, कोलार में किराए के मकान में रहने वाले दो युवकों की गतिविधियां संदिग्ध हैं और वे विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनके पास इससे पहले इतना ज्यादा पैसा कभी नहीं था। साथ ही वे पिछले कई दिनों से तंगी में जीवन यापन कर रहे थे। उन पर कई लोगों की उधारी थी। मुखबिर की सूचना पर क्राइम ब्रांच ने स्थानीय पुलिस की मदद से दोनों युवकों को हिरासत में ले लिया। उनकी पहचान ग्राम सुपेला, सीधी निवासी देवेंद्र पटेल (21) और मसूर, मेरठ निवासी अजय जाटव के रूप में हुई।

कबूली लूट की वारदात: अजय और देवेंद्र ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि आंध्रा बैंक में लूट करना स्वीकार किया। इसके बाद उनके पास से दो लाख 13 हजार 200 रुपए, दो एयर पिस्टल, दो मोबाइल फोन, एक बाइक, कम्प्यूटर, फर्नीचर सहित अन्य सामान जब्त कर लिया गया। एसएसपी योगेश चौधरी ने बताया कि अजय ने कम्प्यूटर में डीसीए किया है। उसके पिता सुशील सशस्त्र सेना बल से रिटायर हुए हैं। दूसरा आरोपी देवेंद्र एमपी नगर स्थित जेटलिंक कंपनी में कोचिंग कर चुका है और चित्रांश कॉलेज के छात्रों के साथ रहता था। दोनों बेरोजगार थे। आरोपियों ने आंध्रा बैंक को निशाना इसलिए बनाया, क्योंकि वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं थे।

इसलिए की बैंक लूट: आरोपी अलग-अलग कंपनियों से अनुबंध कर डाटा एंट्री करने के लिए कम्प्यूटर की एक फर्म शुरू करना चाहते थे। इस काम के लिए उन्हें लाखों रुपए की जरूरत थी। उन्होंने शहर की कई बैंकों से लोन लेने का प्रयास किया। किसी भी बैंक से लोन नहीं मिला, तो आरोपियों ने आंध्रा बैंक को लूटने की योजना बनाई। एसपी ने बताया कि लूट की वारदात के पहले आरोपियों ने आंध्रा बैंक की दो बार रैकी की। इसके बाद उन्होंने 3 सितंबर को दिनदहाड़े बैंक में घुसकर सुरक्षा गार्ड की आंखों में मिर्ची झोंकी और बैंक अधिकारी-कर्मचारियों पर पिस्टल अड़ाकर 14 लाख 92 हजार रुपए लूट लिए।

कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं: पुलिस की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों का कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं था। इसके चलते ही उन तक पहुंचने में पुलिस को तीन महीने का लंबा समय लग गया। समय रहते उनके बारे में कोई सुराग भी नहीं लगा था, लेकिन कम समय में लाखों रुपए के निवेश को करने से उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

एयर पिस्टल का इस्तेमाल: अजय ने घटना से एक दिन पहले मार्केट से चार-चार सौ रुपए कीमत के दो एयर पिस्टल खरीदे थे। बैंक लूटने के बाद आरोपी बैंक मैनेजर की बाइक लेकर फरार हो गए और बाइक को जवाहर चौक बस स्टैंड पर लावारिस छोड़कर आॅटो में बैठकर घर चले गए।

लूट की राशि से शुरू की फर्म: बैंक में लूटी गई राशि से आरोपी अजय ने कई कंपनियों से अनुबंध कर डाटा एंट्री करने वाली प्राइरिटी सिस्टम नाम की फर्म खोल ली। इसके लिए उसने आशीर्वाद कॉलोनी और कोलार रोड किराए की दुकान ली थी। लूट की राशि से 12 कम्प्यूटर, अन्य उपकरण, आॅफिस का फर्नीचर खरीदने और फर्म के विज्ञापन पर खर्च किया। आरोपियों को इसी महीने कंपनियों से डाटा एंट्री के काम का पैसा भी मिलने वाला था।

आर्थिक तंगी से जूझ रहा था अजय: आरोपी अजय ने सालभर पहले प्रेम विवाह किया था। इसके बाद वह घर से भागकर भोपाल आ गया। बेरोजगारी के कारण उसका बैंक बैलेंस खत्म हो चुका था और वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। इसके चलते उसने दोस्त देवेंद्र के साथ मिलकर फर्म खोलने की योजना बनाई।

फरारी में पत्नी की हत्या

मनोज राठौर
17 नवंबर 2011 को भोपाल रेलवे स्टेशन पर जीआरपी रोजाना की तरफ यात्रियों की चेकिंग व्यवस्था में व्यस्त थी। इस दौरान उन्होंने एक संदिग्ध युवक को हिरासत में ले लिया। वह बिना किसी काम के रेलवे स्टेशन पर मौजूद था। उसके पास न ही यात्रा का टिकत और न ही प्लेटफार्म टिकट था। प्रारंभिक पूछताछ में वह आनाकानी करने लगा, लेकिन सख्ती से उसकी तलाशी ली गई, तो उसके पास से एक कट्टा और तीन जिंदा कारतूस मिले। इसके बाद जीआरपी के जवान उसे उठाकर थाने लेकर आ गए। जीआरपी की पूछताछ में उसने बताया कि उसका नाम मनोहर सिंह पुत्र रामदास कुशवाह है और वह ललितपुर स्थित तालबेट का रहने वाला है। उसका रिकार्ड खंगाला गया, तो जीआरपी के रोंगटे खड़े हो गए। जीआरपी को पता चला कि आठ महीने पहले जमीनी विवाद को लेकर मनोहर का झगड़ा पड़ोसी रमेश कुशवाह से हो गया। विवाद बढ़ने पर उसने, उसके पिता रामदास, भाई राजेश, ब्रजेश, अनोखी लाल सहित छह लोगों के साथ मिलकर रमेश से मारपीट की और उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के कुछ दिनों के बाद स्थानीय पुलिस ने मनोहर के एक साथी को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि मनोहर अपने पिता, पत्नी और भाईयों के साथ फरार हो गया।
पुणे में काट रहा था फरारी: मनोहर पुलिस की नजरों से बचने के लिए इधर-उधर छुपने लगा। वे पिता, पत्नी और भाईयों के साथ कई शहरों में रहा, लेकिन उसे कुछ समय पहले पुणे में स्थाई ठिकाना मिल गया। वे अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर मजदूरी करने लगा। पुणे में उसका काम ठीक-ठाक चल रहा था। मोहल्ले उसकी अच्छी पहचान हो गई थी और उसे सभी लोग जानने भी लगे। मनोहर स्थायी रूप से पुणे में जम गया और कभी-कभी चोरी-छुपे अपने स्थानीय गांव होकर भी आ जाता था। उसके पुणे में ठिकाने का पता किसी को नहीं था। उधर, स्थानीय पुलिस भी उसके हत्या के मामले को ठंडे बस्ते में डाल चुकी थी। इसलिए की पत्नी की हत्या: मनोहर के लिए पुणे फरारी काटने का सबसे बढ़िया स्थान साबित हुआ। वह जिस मोहल्ले में रहता था, वहां उसकी अच्छी-खासी चलने लगी और सभी उसे जानने भी लगे। हालांकि, उसकी पत्नी की एक गलती ने उसकी पोल खोलकर रख दी। हुआ यूं कि एक दिन मनोहर अपने पिता और भाईयों के साथ मजदूरी पर निकल गया। घर पर उसकी पत्नी अकेली थी, तभी उसका झगड़ा पड़ोसे से हो गया। उनके बीच बात इतनी बड़ी की, उसकी पत्नी ने मोहल्ले में अपनी धाक जमाने के लिए सबके सामने पति मनोहर द्वारा गांव में की गई रमेश की हत्या की पोल खोल दी। शाम को मनोहर घर पहुंचा, तो सभी मोहल्ले वाले उसे शक की निगाहों से देखकर देने लगे। इस पर उसे संदेह हुआ और उसने पत्नी से पूछा कि आज सभी मुझे शक की निगाहों से क्यों देख रहे हैं। पहले तो उसकी पत्नी लंबे समय तक चुप रही, लेकिन बाद में उसने पड़ोसी से हुए झगड़े की बात उसे बता दी। इसके बाद क्या था। मनोहर का खून खोल गया और उसने पत्नी की हत्या करने की योजना बनाई। उसे डर था कि यदि पुलिस को ये बात पता चल गई, तो वे और उसके पिता व भाई पकड़ा जाएंगे। इसके चलते ही उसने अपनी पत्नी का गला दबाया और उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने पत्नी की लाश को पत्थर से बांधकर एक कुएं में फेंक दी। पत्नी की हत्या के बाद वह अपने परिवार के साथ दूसरे ठिकाने के लिए पुणे से निकल गया।
पिता और भाई भी हुए गिरफ्तार: जीआरपी की गिरफ्त में आए मनोहर को छुड़ाने के लिए उसके पिता रामदास और भाई थाने पहुंचे थे। वहां पड़ोसी की हत्या की पोल खुलने पर जीआरपी ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया।

बुरी नजर रखने पर किया घिनौना अपराध

मनोज राठौर

बागसेवनिया निवासी आशा कौशल (50) मूल रूप से खंडवा की रहने वाली है। वह करीब पांच साल पहले भोपाल में काम की तलाश में आईं। आशा यहां अपनी बेटी के पास रहने लगी और दूसरों के घरों में बर्तन धोने और खाना बनाने का काम करने लगी। ढाई साल तक आशा ने इधर-उधर काम किया, लेकिन बाद में उसकी नौकरी 1800 रुपए प्रति माह में ई-13, सुरेंद्र गार्डन निवासी मुकेश सूरी (40) के घर में लग गई। वह सूरी के घर की साफ-सफाई से लेकर उनके परिवार के सदस्यों का खाना भी बनाती थी। वह रोजाना सुबह आठ बजे उनके घर पहुंचती और दोपहर का खाना बनाकर के बाद ही घर लौटती। इस दौरान उनके साथ कभी-कभार उनकी 18 वर्षीय मोना (परिवर्तित नाम) भी आ जाती थी। मगर, आशा ने 16 अक्टूबर 2011 को जो कुछ भी काम किया, उससे उसकी नौकरी तो चली गई। साथ ही उसे हवालात की हवा भी खानी पड़ी।

नौकरानी का घिनौना काम: मुकेश सूरी की सूरी इंटीरियर नाम से कंसलटेंसी कंपनी है। वह काम के सिलसिले में अधिकांश समय घर से बाहर रहते हैं। घर पर उनकी मां कुसुम, पत्नी रमन और बच्चे रहते हैं। कुछ महीनों से सूरी को शक हो रहा था कि उनके घर के रसाईघर से खाने-पीने का सामान एक के बाद एक कर चोरी हो रहा है। इससे उनका बजट भी हर महीनें डेढ़ हजार रुपए बढ़ रहा है। इस पर उन्होंने परिवार की सलाह से 15 अक्टूबर को अपने घर के कई हिस्सों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए। एक कैमरा रसाईघर में भी लगा हुआ था। इसके बाद 16 अक्टूबर की सुबह सूरी अपनी पत्नी और मां के साथ कमरे में बैठकर सीसीटीवी कैमरे के जरिए अपने कम्प्यूटर पर घर में आने वाली गतिविधियों की लाइव फुटैज देखने लगे। उन्होंने कम्प्यूटर की स्क्रीन पर देखा कि सुबह करीब आठ बजे नौकरानी आशा घर में आई और बिना शोर मचाए सीधे रसोई में चली गई। उसने सबसे पहले एक डिब्बे से शकर निकाली और उसे एक कपड़े में बांधकर अपने ब्लाउज में रख लिया। यहां तक तो ठीक था। सूरी को यह तो पता चल गया था कि उसके घर का सामान नौकरानी ही चोरी करती है। उसके पास सबूत भी थे। मगर, इसके बाद सूरी ने कम्प्यूटर पर जो दृश्य देखा, उसे देखकर वे दंग रह गए। वीडियो फुटेज के अनुसार शकर चोरी करने के बाद नौकरानी ने बर्तनदान में से एक ग्लास उठाया और उसमें अपना पेशाब भर लिया। इसके बाद उसने पेशाब से भरे ग्लास को पीने की टंकी में डाल दिया, जिसमें से सूरी और उसका परिवार पानी पीता था। यह देखने के बाद सूरी भड़क गए और उन्होंने आशा तथा उसके साथ आई उसकी नातिन मोना को कमरे में बंद कर दिया। सूरी ने तत्काल घटना की जानकारी बागसेवनिया थाने में दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर आशा को गिरफ्तार कर लिया।

ठीक नहीं थी नियत: मिसरोद एसडीओपी सारिका शुक्ला और थाना प्रभारी सीपी द्विवेदी ने थाने की हवालात में बैठी नौकरानी आशा से पूछताछ करने की कोशिश की, तो उसने देर रात तक कोई जबाव नहीं दिया। वह चुप-चाप बैठी हुई थी और अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से थाने में इधर-उधर घूम रहे पुलिस कर्मियों को देख रही थी। उधर, पुलिस को उसके बयान लेना भी जरूरी थे, क्योंकि उसे 17 सितंबर को अदालत में पेश जो करना था। इसके चलते पुलिस ने अदालत ले जाने से पहले आधा से दोबारा पूछताछ की, तो उसने अपनी चुप्पी तोड़ दी और जो कहा, उसे सुनने के बाद पुलिस दंग रह गई। आशा ने पुलिस को बताया कि मालिक सूरी उसकी नातिन पर ठीक नियत नहीं रखता था। वह उसे अश्लील निगाहों से देखता था। उसका आरोप है कि जब वह मोना को अपने साथ लेकर नहीं आती, तो सूरी उसे टोक देता। वह मोना को काम पर लाने की बात कहता। इससे तंग आकर उसने यह घिनौना काम किया। हालांकि, अदालत से जमानत लेने के बाद से नौकरानी गायब है। पुलिस दोबारा उसके बयान दर्ज करने की फिराक में है, ताकि उसकी बातों को ध्यान में रखकर आगे की कार्रवाई की जा सके।

बश चलता तो जहर दे देती: मोना दिखने में चंचल और खूबसूरत थी। घर पर अकेली रहने के कारण कभी-कभार आशा उसे अपने साथ सूरी के घर लेकर आ जाती थी। मगर, मोना के प्रति सूरी की नियत भांपने के बाद आशा उसे अपने साथ लेकर नहीं आने लगी। वह उसे घर पर ही छोड़ आती थी। आशा ने यह भी बताया कि मालिक सूरी नातिन को रोजाना अपने घर लाने की बात कहता था। उसकी नियत ठीक नहीं थी। उसका आरोप है कि मोना को साथ नहीं लाने पर सूरी उसे नौकरी से निकालने की धमकी देता था और उसे चोरी के मामले में फंसाने की बात भी कहता था। आशा ने पुलिस के सामने यह बात भी कबूली की, यदि उसका बश चलता तो वह मालिक को पेशाब की जगह जहर दे देती। लेकिन उसे जहर मिला नहीं। इसलिए उसने सूरी को सबक सिखाने के लिए ऐसा घिनौना कृत्य किया। आशा को अपनी इस करतूत पर जरा-सा भी अफसोस नहीं था।

Friday, January 20, 2012

हसीन चालबाज पिंकी...

छोला मंदिर में सहेली द्वारा लूट का मामला

मनोज राठौर

29 सितंबर 2011, दोपहर तीन बजे गंजसौदा निवासी मोनिका यादव (18) बजरिया स्टेशन स्थित राजेंद्र नगर में रहने वाली बड़ी बहर कामनी के साथ पीपुल्स डेंटल कॉलेज से घर लौट रहीं थी। उनके साथ कामनी की सहेली पिंकी उर्फ स्वाति नामदेव थी। वह छोला मंदिर स्थित रेलवे फाटक के पास आॅटो से उतरने के पैदल घर की तरफ जा रही थी। तीनों आपस में बाचतीत करते हुए अपनी मस्ती में चली जा रही थी। द्वारका नगर स्थित अंडर ब्रिज के पास एक नकाबपोश युवक ने मोनिका के हाथ से नोटों से भरा पर्स छीन लिया और रेलवे पटरी की सहारे कैंची छोला मंदिर की ओर भाग निकला। इस दौरान कामनी ने गोद में रखी बेटी को मोनिका को दी और लुटेरे का थोड़ी दूर तक पीछा किया, लेकिन लुटेरा कीचड़ में गिरता-पड़ता हुए भाग निकलने में सफल हो गया। पर्स में एक लाख 70 हजार रुपए थे, जो उसे एडमिशन के लिए जमा करने थे। लूट की घटना से छोला मंदिर क्षेत्र में सनसनी फैल गई। घटना स्थल के आसपास रहने वाले लोगों ने लूट की खबर छोला मंदिर थाना प्रभारी राजेश मिश्रा को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटना का मुआयना और नाकेबंदी की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। उधर, थाने पहुंची मोनिका बेहोश हो गई। किसी तरहा उसे होश आया और इसके बाद पुलिस ने उसके बयान के आधार पर रिपोर्ट दर्ज की।

ऐसे फंसी चालबाज पिंकी: मोनिका को पता नहीं था कि बड़ी बहन के साथ कदम से कदम मिलाकर जो युवती चल रही है, वह लूट की घटना की मास्टर माइंट निकलेगी। घटना की जानकारी मिलने पर सीएसपी रश्मि मिश्रा भी थाने पहुंच गई थी। उन्होंने थाना प्रभारी मिश्रा के साथ मिलकर घटना के बारे में मोनिका से पूछताछ की। पूछताछ में पुलिस को उसकी बड़ी बहन कामनी की सहेली पिंकी पर संदेह हुआ। सो, बिना वक्त गवाए सीएसपी ने पिंकी का मोबाइल फोन ले लिया और उसकी कॉल डिटेल निकलवाई। कॉल डिटेल में सामने आया कि पिंकी ने घटना के दौरान कई बार यादव से बातचीत की थी। पुलिस का शक उस समय ओर अधिक गहरा गया, जब उसने पुलिस को बताया कि वह मोनिका का एडमिशन कराने के लिए उसे कॉलेज ले गई थी और वहां मोनिका की मुलाकात एक युवक से कराई, जो उसके साथ मौजूद है। इस पर पुलिस ने पिंकी के साथ आए गिरीश कुमार यादव उर्फ रोहित नाम के युवक से सख्ती से पूछताछ की, तो उसने लूट की कहानी से पर्दा उठा दिया। इसके बाद पुलिस ने पिंकी पर शिकंजा कस दिया। पुलिस उसकी निशानदेही पर मंडीदीप में रहने वाले उसके पति अशोक नामदेव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके पास से लूट के 1,69,300 रु. बरामद किए गए।

ये है लूट की कहानी: पंकी ने घटना से दस दिन पहले घर पर बैठकर अपने पति अशोक नामदेव और दोस्त गिरीश कुमार यादव के साथ लूट की साजिश रची थी। प्लानिंग के तहत उसने चार दिन पहले मोनिका से डेंटल कॉलेज में एडमिशन कराने के बहाने 30 हजार रुपए एडवांस लिए। इसके बाद वह उसे एडमिशन दिलाने के कहकर अपने साथ कॉलेज ले गई। वहां से लौटते समय उसने पति नामदेव को अंडर ब्रिज के पास खड़ा रहने के लिए कहा और रोहित पूरे घटनाक्रम पर नजर रखा हुआ था। जैसे ही मोनिका अंडर ब्रिज के पास पहुंची, वैसे ही पिंकी ने मोबाइल फोन से पति को अलर्ट कर दिया। फिर क्या था, मुंह पर कपड़ा बांधकर खड़े नामदेव ने मोनिका से पर्स छीन लिया और फरार हो गया। प्लानिंग के तहत नामदेव टैक्सी कर सीधे मंडीदीप स्थित अपने किराए के मकान पर पहुंचा।

टॉयलेट में छुपाए थे रुपए: अशोक मंडीदीप में रहता है और वहीं लयूपिन फैक्टरी में काम करता है। लूट के बाद अशोक मंडीदीप चला गया और घर की टॉयलेट की फर्सी के नीचे रुपए छुपा दिए। मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी अशोक को गिरफ्तार कर उसके पास से लूट की राशि बरामद कर ली। मंडीदीप जाते समय आरोपी ने 700 रुपए खर्च भी कर दिए थे।

फर्जीवाड़े का होगा खुलासा: इस मामले में पुलिस को एडमिशन दिलाने का झांसा देकर छात्रों से रुपए ऐंठने वाला कोई गिरोह जुड़ा होने की संभावना थी, क्योंकि पिंकी ने मोनिका को पीपुल्स डेंटल कॉलेज में एडमिशन दिलाने का झांसा दिया था। एडमिशन के सिलसिले में कुछ दिनों पहले ही उसने रोहित के साथ मिलकर मोनिका और उसके बहनोई जितेंद्र की बैरागढ़ में रहने वाले एक कथित डॉक्टर जैन से मुलाकात कराई थी। वहां डॉक्टर ने मोनिका को एडमिशन दिलाने का आश्वासन भी दिया था। इसके बाद पिंकी ने मोनिका से रजिस्ट्रेशन फीस के एवज में 30 हजार रुपए भी ले लिए। उसने उक्त राशि का एक कम्प्यूटर और कुछ घरेलू सामान खरीद लिया था। हालांकि, पुलिस मामले की जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची।

10 साल पहले भोपाल आई थी पिंकी: आरोपी पिंकी भी गंजबासौदा स्थित कामनी के मायके के पास रहती थी। उसे पिता भी कामनी के पिता के साथ रेलवे विभाग में नौकरी करते थे। पिंकी के घर के पास ही अशोक नामदेव की एसटीडी पीसीओ की दुकान थी। वह अक्कसर वहां फोन लगाने के लिए जाती थी। इसके चलते उसकी दोस्ती अशोक से हो गई। हालांकि, अशोक उम्र में पिंकी से काफी बड़ा था, लेकिन दिल का क्या। पिंकी ने उसे पसंद कर लिया और उसके साथ भागकर शादी करने का फैसला भी कर दिया। उन्होंने एक दिन भागकर शादी कर ली और मुंबई में जाकर रहने लगे। वे वहां एक फिल्म प्रोड्यूसर के घर नौकरी करने थे और वहीं पर रहते भी थे। उधर, पिंकी ने प्रोड्यूसर को अपने जाल में फंसाकर अभिनेत्री बनने का सपना देखा, लेकिन वह उसे झांसे में नहीं आया। इस पर चालबाज पिंकी और उसका पति भोपाल आ गए, जहां पिंकी कोटरा सुल्तानाबाद में रहने लगी, जबकि अशोक मंडीदीप स्थित फैक्टरी में काम काम करने लगा और वहीं एक किराए के मकान में रहने लगा।

रोहित से ऐसे हुई दोस्ती: रोहित पेशे से इंजीनियर है। उसकी पिंकी से मुलाकात उसकी प्रेमिका ने कराई। वह प्रेमिका के साथ अक्कसर पिंकी के घर रूकता था। हालांकि, घटना से चार-पांच महीनें पहले रोहित और उसकी प्रेमिका के बीच अनबन हो गई और दोनों अलग-अलग हो गए। उधर, रोहित भी पिंकी के साथ आधा-आधा किराए देने की शर्त पर रहने लगा। इस बीच उसकी दोस्ती पिंकी के पति से हो गई और उन्होंने पिंकी के कहने पर मोनिका से लूट करने की योजना बनाई।

पत्नी के इशारे पर करता था चोरी

मनोज राठौर
हबीबगंज सीएसपी राजेश सिंह भदौरिया 25 नवंबर 2011 को आॅफिस में बैठे हुए थे। इस दौरान उन्हें एक मुखबिर ने फोन पर बताया कि साईं बोर्ड 11 नंबर स्टॉप के पास पुराने कम्प्यूटर और मोबाइल फोन बेचने की फिराक में दो युवक घूम रहे है। इस पर भदौरिया ने बीना वक्त गवाए पुलिस की एक टीम तैयार की और उसे मौके पर रवाना कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों युवकों को दबोच लिया। एक युवक भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पुलिस के घेरे से वह बच नहीं सका। उनके पास से कम्प्यूटर और मोबाइल फोन भी बरामद किए। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों युवक खुद को कबाड़ी बता रहे थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि वह पुराने कम्प्यूटर लोगों से कबाड़े में खरीदकर लाए हैं, जिससे वह बेचना चाहते हैं। संदेह होने पर पुलिस ने उनसे सख्ती से पूछताछ की, तो वे दोनों टूट गए। उनकी पहचान अरेरा कॉलोनी, झुग्गीबस्ती निवासी सलमान खान पिता छुट्टन खान (20) और देवा जाधव पिता भीखा जाधव (23) के रूप में हुई। पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने शहर के शिवाजी नगर, रविशंकर मार्केट, बघीरा अपार्टमेंट, अरेरा कॉलोनी सहित मिसरोद क्षेत्र में अभी तक चोरी की नौ वारदात की हैं। सलमान और देवा अपने साथी अस्सू खान, रहमान, परमपाल, शंकर और जीतू उर्फ जितेंद्र के साथ वारदात को अंजाम देते थे। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने जाल बीछाकर हबीबगंज क्षेत्र से अस्सू को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को रहमान, परमपाल, शंकर और जीतू की तलाश है। आरोपियों ने साढ़े तीन लाख रुपए कीमत के कम्प्यूटर मॉनीटर, सीपीयू, प्रिंटर, घाड़ियां इंवेर्टर की बैटरी, सोने-चांदी के जेवर सहित अन्य सामान बरामद किया है।
रैकी के बाद वारदात को अंजाम: गिरोह का सरगना देवा जाधव है। वह कई सालों से चोरी की वारदात को अंजाम दे रहा था। उसकी पत्नी को उसकी हर एक जानकारी रहती थी। उसे पता रहता था कि उसका पति आज कहां चोरी करेगा। दरअसल, पूछताछ में देवा ने बताया कि उसकी पत्नी अरेरा कॉलोनी क्षेत्र के कई घरों में साफ-सफाई का काम करती है। इस दौरान वह सूने घरों को जानकारी अपने पति देवा को देती थी। पत्नी के निशानदेही पर आरोपी देवा अपने साथियों के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम देता था। इसके अलावा देवा के साथी भी शहर में दिनभर रेकी करने का काम करते थे। इस दौरान उनके निशाने पर ऐसे मकान होते थे, जहां काफी दिनों से साफ-सफाई नहीं हुई हो और वहां आंगन में सूखे पत्ते पड़े हों। आरोपी उस घर की दो बार रेकी करते थे और मौका पाकर वारदात को अंजाम देते थे।
अय्याशी में उड़ाते थे पैसे: अधिकांश आरोपियों की पत्नी घरों में साफ-सफाई करने का काम करती हैं। उनके पति उन्हें दो वक्त की रोटी भी कमाकर नहीं देते हैं। देवा और उसके साथी चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद सामान को औने-पौने दामों में ठिकाने लगा देता था। इसके बाद वह आपस में थोड़े-होत रूपए बांट लेते थे और बाकी को शराब और अय्याशी में उड़ाते थे। वे कुछ पैसे घर में देते थे, लेकिन इससे उनके महीनेभर का राशन भी नहीं आता था। गिरोह के सदस्य खोलेंगे राजआरोपियों से पूछताछ में पुलिस को पता चला है कि फरार रहमान, परमपाल, शंकर और जीतू का मिलकर एक अन्य गिरोह का संचालन करते हैं। वे कभी-कभी देवा और सलीम के साथ मिलकर चोरी की वारदात को अंजाम देते थे। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि फरार आरोपियों ने शहर में लूट जैसी वारदात को अंजाम भी दिया है। फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस ने तीन टीमें बनाई हैं, जो भोपाल सहित आसपास के जिलों में उनकी तलाश कर रही है।

महिला पुलिसकर्मी से बलात्कार

पहले दोस्ती की। इसके बाद महिला पुलिसकर्मी से नजदीकियां बढ़ाई और शादी का झांसा देकर उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। ये घिन्नौना काम किसी आम आदमी ने नहीं, बल्कि एक पुलिसकर्मी ने किया...
मनोज राठौर
प्रोफेसर कॉलोनी स्थित पुलिस लाइन में रहने वाली 29 वर्षीय मोना (परिवर्तित नाम) ईओडब्ल्यू में सिपाही है। वह मूल रूप से जबलपुर की रहने वाली है, लेकिन पोस्टिंग के कारण पिछले दो साल से भोपाल में रह रही है। वह अपने-घर आती-जाती रहती थी। हालांकि, 2011 से डेढ़ साल उनकी दोस्त शाहजहांनाबाद थाने में पदस्थ सिपाही जितेंद्र तिवारी से हो गई। यह दोस्ती कुछ ही दिनों में नजदीकियां में तब्दील हो गई और जितेंद्र ने मोना को अपने प्यार के जाल में फंसा लिया। उसने डेढ़ साल तक मोना को अपनी हवस का शिकार बनाया और बाद में उसका ट्रांसफर कटनी हो गया। इसके बाद मोना ने उससे संपर्क किया, तो उसने बातचीत करना बंद कर दी और उससे किनारा करने लगा। मोना उससे शादी की बात कही, तो वह आनाकानी करने लगा और उससे हर बार शादी करने का झूठा आश्वसन देता रहा। एक दिन मोना ने उससे परिवार के सदस्यों से संपर्क कर शादी की बात रखी। इस पर जितेंद्र और उसके परिजन ने शादी करने से साफ-साफ मना कर दिया। ऐसी स्थिति में मोना के पास एफआईआर दर्ज कराने के अलावा ओर कोई चारा नहीं था। सो, उसने जितेंद्र के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया।
ऐसा शुरू हुई कहानी: जितेंद्र और मोना कई सालों से एक-दूसरे को जानते हैं। दोनों ही जबलपुर के रहने वाले हैं। पुलिस में आने के बाद उनकी दोस्ती ओर ज्यादा गहरी हो गई। उधर, संजोग की बात थी कि दोनों की पोस्टिंग भोपाल में हो गई। मोना और जितेंद्र एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे, इसलिए वे भोपाल में एक-दूसरे घर आते-जाते रहते थे। कई बार तो दोनों एक साथ बाहर खाना भी खाते थे। मगर, यह दोस्ती कब प्यार में बदल गई। यह बात मोना और जितेंद्र को पता ही नहीं चली। फिर क्या था, दोनों दिखने में खुबसूरत थे और जवान भी थे। वे जिंदगी की इस दौरान से गुजर रहे थे, जहां किसी का साथ होना जरूरी रहता है। जितेंद्र ने प्यार के बहाने मोना को शादी का झांसा दिया। उसने मोना से वादा किया कि वह शादी करेगा, तो सिर्फ उसी से करेगा। वे पुलिस में रहने के दौरान अच्छे से बच्चों की परवरिश कर सकेंगे, लेकिन यह वादा सिर्फ सफेद झूठ के सिवाए कुछ नहीं था। वह इसी वादे की दम पर मोना के करीब आ गया और उसने करीब डेढ़ साल तक उसे अपनी हवस का शिकार बनाया।
दोस्ती तोड़ना चाहता था: जैसे-जैसे जितेंद्र और मोना के बीच एक-साथ रहने का समय बढ़ता जा रहा था, वैसे-वैसे जितेंद्र उससे दूरियां बनाने लगा था। उसका मोना से दिल भरा गया था और वह उससे दोस्ती तोड़ना चाहता था। मगर, मोना कहा मानने वाली थी। उसके सिर पर तो शादी का भूत सवार था। उसने जितेंद्र पर शादी करने का प्रेशर बनाया, तो उसने किसी तरह अपना ट्रांसफर कटनी करवा लिया। उसे कटनी में कुछ दिन हुए थे, तभी मोना ने उससे शादी के संबंध में फाइनल जबाव मांगा। इस पर जितेंद्र प्रेशर में आकर शादी के लिए तैयार हो गया, लेकिन यह प्रेशर थोड़े दिनों का ही था। इसके बाद मोना ने जितेंद्र से संपर्क किया, तो उसने उसका फोन नहीं उठाया। इस पर मजबूर होकर मोना जबलपुर स्थित जितेंद्र के घर चली गई और वहां उसके परिजन से शादी की बात कही। हालांकि, परिजन शादी का नाम सुनकर भड़क गए और उससे वहां से चलता कर दिया।
जबलपुर से भोपाल आई डायरी: जितेंद्र के घर से जाने के बाद मोना चार नवंबर को जबलपुर के आधारताल थाने पहुंची और जितेंद्र के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया। घटनास्थल प्रोफेसर कॉलोनी होने के कारण आधारताल पुलिस ने जीरो पर मामला दर्ज कर केस डायरी को श्यामला हिल्स थाने में भेज दिया। मोना ने रिपोर्ट में लिखवाया कि डेढ़ साल पहले उसकी दोस्ती शाहजहांनाबाद थाने में पदस्थ सिपाही जितेंद्र तिवारी से हुई थी। इसके बाद जितेंद्र उसके घर आने-जाने लगा। मोना ने बताया कि जितेंद्र ने उसे शादी का झांसा दिया और करीब 18 महीनों तक उसके साथ ज्यादती की। वह कुछ दिनों पहले ही जबलपुर स्थित जितेंद्र के घर शादी की बात करने के लिए पहुंची, तो उसके परिजन ने शादी करने से इनकार कर दिया। इसके चलते ही उसने जितेंद्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई।

...सौतेली मां की हत्या

मनोज राठौर


मोहल्ले वालों के रोज-रोज के तानों से आकर अमन ने अपनी सौतेली मां की जान ले ली। उसे मां के चरित्र पर शक था, जिसके चलते ही लोग उसपर ताने कसते थे। उसने मां को घर में आने के लिए मना भी किया था, लेकिन वह सप्ताहभर बाद घर में आ आई और अमन ने उसकी चाकू से गोदकर हत्या कर दी।शर्मा कॉलोनी, शाहजहांनाबाद निवासी प्रदीप घौंसले (40) प्राइवेट काम करते हैं। उनके तीन बेटे हैं, जिसमें सबसे छोटा बच्ची उर्फ हरीश उर्फ अमन (17) है। बाकी के दो बेटे भी मेहनत-मजदूरी करते हैं। अमन भी कभी-कभार काम पर जाता था। उसका अधिकांश समय कॉलोनी में रहने वाले दोस्तों के साथ गुजराता था। उसकी मां की करीब नौ साल पहले मौत हो गई थी। इसके बाद प्रदीप ने बेटों की परवरिश के लिए शाहजहांनाबाद निवासी लक्ष्मी बाई (35) को पत्नी बनाकर रख लिया। कुछ सालों तक उनके बीच सबकुछ ठीक चला, लेकिन बाद में उनके बीच अनबन शुरू हो गई। लक्ष्मीबाई के कारण बाप-बेटों में आए दिन झगड़ा होने लगा। मगर, यह झगड़ा 27 अक्टूबर 2011 की दोपहर साढ़े तीन बजे हमेशा के लिए समाप्त हो गया। हुआ यूं कि दोपहर 3.30 बजे लक्ष्मीबाई अपनी बहन के घर से सौतेल पति प्रदीप के घर पहुंची। वहां किसी बात को लेकर उसका प्रदीप से झगड़ा हो गया। इस दौरान अमन सौतेली मां लक्ष्मीबाई को घर में दाखिल नहीं होने नहीं दे रहा था। इधर, बात बढ़ने पर प्रदीप और लक्ष्मीबाई के बीच मारपीट शुरू हो गई और प्रदीप ने पत्नी को जमीन पर पटक दिया। इसी दौरान अमन घर में गया और चाकू लेकर आ गया। इससे पहले की प्रदीप कुछ समझ पाता, उसने सौतेली मां के पेट पर ताबड़ तोड़ वार कर दिए। इसमें लक्ष्मी बाई घायल होकर सड़क पर गिर गई और घटना से घबराए बाप-बेटे फरार हो गए। कॉलोनी के लोगों की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने लक्ष्मीबाई को 108 एंबुलेंस से हमीदिया अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


इसलिए की हत्या: पुलिस की गिरफ्त में आए अमन ने पूछताछ के दौरान बताया कि कॉलोनी के लोग और दोस्त उसे ताना देते थे कि उसके मां का चरित्र ठीक नहीं है। दोपहर के समय उनके घर गैर मर्दाें का आना-जाना लगा रहता है। लोगों ने यह भी कहा कि इससे कॉलोनी का माहौल खराब हो रहा है। इतना ही नहीं इसके चलते ही अमन के दो भाईयों की शादी भी नहीं हो रही थी और रिश्तेदार उन पर ताने कसते थे। रोजाना के तानों से परेशान आकर अमन ने अपनी मां की करतूतों को आंखों से देख भी लिया। इसके बाद उसने निर्णय कि वह अपने घर में सौतेली मां लक्ष्मीबाई को नहीं आने देगाा। घटना से छह-साल दिन पहले अमन और उसकी सौतेले मां लक्ष्मीबाई के बीच झगड़ा हुआ। इस दौरान अमन ने उसे डांट कर भगा दिया और वापस घर में नहीं आने के धमकी दी। इस पर लक्ष्मीबाई भी सप्ताहभर शाहजहांनाबाद में रहने वाली बहन के घर में रही। मगर, उसने आखिरकार घर आने की गलती कर दी और अमन ने उसकी जान ले ली।


होती थी मारपीट: घर में छोटा होने के कारण लक्ष्मीबाई अमन से आए दिन मारपीट करती थी। कॉलोनी के लोगों ने घटना वाले दिन अमन को जो रूप देखा, उससे देखकर वे भी दंग रह गए। प्रदीप और लक्ष्मीबाई के बीच झगड़ा चल रहा था, उस समय अमन घर के दरवाजे पर खड़ा था। उसकी मां ने उसे भी गाली देना शुरू की, तो वह इसका विरोध करने के लिए मां के पास पहुंचा। वहां लक्ष्मीबाई ने उसके गाल पर दो तमाचे चढ़ दिया। इससे नाराज अमन गाली-गलौच करते हुए घर में गया और चाकू लेकर आ गया।

Thursday, January 19, 2012

धोखे से बनाई अश्लील सीडी


मनोज राठौर

शाहजहांनाबाद का अश्लील सीडी कांड तलैया स्थित फहेतहगढ़ निवासी अजहर खान की तीन-चार साल पहले समीरा खान से शादी हुई थी। कुछ सालों बाद समीरा ने एक बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म से पहले अजहर प्राइवेट काम करता था, लेकिन उसके जन्म के बाद उसने का-धंधा छोड़ दिया। इसके बाद वह इधर-उधर दोस्तों के साथ फालतू घूमने लगा। इस दौरान उसकी मुलाकात शाहजहांनाबाद क्षेत्र के ईदगाह हिल्स में रहने वाले एक व्यापारी की 26 वर्षीय बेटी सोनिका (परिवर्तित नाम) से हो गई। यह मुलाकात धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। इसके बाद अजहर सोनिका के घर के चक्कर काटने लगा।

यह हुआ आगे: अजहर सोनिका के प्यार में पागल हुआ जा रहा था। वह उसे एक नजर देखने के लिए उसके घर के आसपास घूमता था। इस दौरान सोनिका भी अजहर के प्यार के चक्कर में फंस गई, लेकिन उसे मालूम नहीं था कि अजहर के शातिर दिमाग में कुछ ओर ही चल रहा है। वह योजना के तहत सालभर पहले सोनिका के घर पहुंचा। घर पर सोनिका अकेली थी, उसके परिजन किसी काम से नागपुर गए थे। इसके बाद क्या था, मौका पाकर अजहर ने सोनिका की मोबाइल फोन से अश्लील वीडियो रिकोर्डिंग कर ली। इधर, सोनिका को कुछ पता ही नहीं चला।

ऐसे खुला राज: अजहर ने सोनिका के अश्लील वीडियो को एक पेन-ड्राइव में लोड किया। इसके बाद उसने पेन-ड्राइव को पत्नी समीरा के नजरों से छुपाकर रख दिया। इसी साल जुलाई में साफ-सफाई करते समय अजहर की पेन-ड्राइव समीरा के हाथ लग गई। समीरा भी पढ़ी-लिखी थी, सो उसने घर के कम्प्यूटर में पेन-ड्राइव लगाई और उसमें लोड सोनिका की अश्लील वीडियो देख ली। पहले तो उसे अपने पति की करतूत पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन बाद में उसने किसी तरह सोनिका के बारे में पता लगा लिया। इसके बाद उसने सोनिका के भाई को फोन कर अपने पति की हरकत के बारे में बताया और उसे वीडियो की एक सीडी बनाकर भेज दी। इसी सीडी के आधार पर सोनिका के पिता ने शाहजहांनाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

एफआईआर से पहले पकड़ाया अजहर: व्यापारी ने अपनी बेटी की अश्लील वीडियो रिकोर्डिंग की बात शाहजहांनाबाद टीआई जेपी मिश्रा को बताई, तो उनके रोंगटे खड़े हो गए। उन्होंने आनन-फानन में घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को बताई। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से पहले अजहर को उसके घर से पकड़ लिया। पुलिस पूछताछ में अजहर ने बताया कि वह सोनिका से प्यार करता था। उसने उसकी रजामंदी से वीडियो रिकोर्डिंग की। हालांकि, पुलिस ने उससे सख्ती पूछताछ करते हुए अश्लील वीडियो रिकोर्डिंग से पर्दा उठाया। फिलहाल, आरोपी अजहर सेंट्रल जेल में बंद है।

प्यार या जबरदस्ती: इस मामले में अजहर ने पुलिस को प्रेमप्रसंग की बात बताई, लेकिन पुलिस ने फरियादी व्यापारी की शिकायत पर उसकी एक नहीं सुनी। पुलिस अभी तक यह पता नहीं लगा पाई कि यह प्रेमप्रंसग का मामला है, या फिर जबरदस्ती का। टीआई जेपी मिश्रा ने बताया कि सोनिका इंदौर में रिश्तेदारों के घर है। इसके चलते ही उसके बयान दर्ज नहीं हो पाए। उसके बयान होने के बाद ही मामले की स्थिति और परिस्थितियों का खुलासा हो पाएगा।

ब्लैकमेल कर रहा था अजहर: सोनिका के परिजन का आरोप है कि अश्लील सीडी के नाम पर अजहर सालभर से मोनिका को ब्लैकमेल कर रहा था। उसने सीडी की बात परिजन को बताने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी होगी।

समीरा को शक था पति पर: समीरा को सालभर पहले कुछ साथियों से पता चला था कि उसके पति अजहर के चाल-चलन कुछ ठीक नहीं है। वह एक युवती के चक्कर में आ गया है। इसकों लेकर कई बार समीरा का झगड़ा पति से हुआ, लेकिन अजहर ने मामले को बड़े प्यार से शांत करा दिया। उसने समीरा को विश्वास में लिया और उसके प्रेमप्रंसग की कहानी को अफवाह बताया। हालांकि, पेन-ड्राइव से पति की असलियत पता चलने पर उसने पहले पति की काली करतूत की शिकायत थाने में की और बाद में घर छोड़कर मायके चली गई।

इसका खुलासा नहीं: परिजन का आरोप था कि उन्हें किसी ने फोन कर बताया कि उनकी बेटी की अश्लील वीडियो इंटरनेट पर लोड कर दी गई। यह जानकारी पुलिस को पति चली, तो उसने साइबर सेल की सहायता से नेट पर सीडी की तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। साथ ही समीरा ने पेन-ड्राइव की सहायत से सीडी बनवाई थी। यह सीडी उसने कहां से बनवाई, पुलिस इस बिंदू पर भी जांच कर रही है। यह दोनों पहलू पुलिस के लिए तेढ़ी खीर साबित हो रहे हैं।

गोपनीयता हुई भंग: सोनिका के परिजन मामले को गोपनीय रखने की शर्त पर शाहजहांनाबाद थाने में अजहर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, लेकिन मामला मीडिया में आने के बाद परिजन घर पर ताला लगाकर इंदौर चले गए हैं। इसके चलते ही अभी तक युवती के बयान भी दर्ज नहीं हो पाए हैं।

पहले भी आ चुके हैं मामले

तीन बच्चियों का अश्लील एमएमएस का मामला : रातीबड़ स्थित केरवा डेम पर गत 29 मार्च 2010 को रोशनपुरा बस्ती निवासी तीन बच्चियों की अश्लील एमएमएस बनाने की कोशिश की गई। हालांकि, डेम स्थित चौकी पुलिस ने आरोपी रामस्वरूप और सुनील को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी पिकनीक मनाने का झांसा देकर बच्चियों को डेम पर ले गए थे। वहां आरोपी उनके कपड़े उताकर मोबाइल फोन से वीडियो रिकोर्डिंग कर रहे थे। इससे पहले भी आरोपी एक अन्य बच्ची का एमएमएस बना चुके हैं।
मोनिका बेदी का अश्लील एमएमएस बनाने का मामला: फर्जी पासपोर्ट कांड मामले में सालभर तक भोपाल सेंट्रल जेल में रही फिल्म अभिनेत्री मोनिका बेदी का अश्लील एमएसएस बनाने का मामला सामने आया था। आरोप था कि जेल के बाथरूम में लगाए गए कैमरों की मदद से मोनिका बेदी का एमएमएस बनाया गया। इस मामले की जांच में बाथरूम में कैमरा लगाए जाने की बात सही नहीं पाई गई। साथ ही मोनिका के बैरक में रहने वाली महिला कैदियों ने अपने बयानों में एमएमएस बनाए जाने की बात से इंकार कर दिया था।

सहेली के भाई ने बनाई अश्लील सीडी: महिला थाने में फरवरी 2010 को एक बारहवीं की छात्रा ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसकी सहेली के भाई और दोस्त ने उसकी अश्लील सीडी तैयार की है। वह उसे बहला फुसलाकर अपने साथ ले गए थे। उसका आरोप था कि सीडी के नाम पर उसे ब्लैकमेल और उसके साथ दुष्कृत्य किया गया। इस मामले में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया था।

छात्रा की बनाया अश्लील एमएमएस: तीन साल पहले बैरागढ़ में रहने वाली एक छात्रा का चार युवकों ने मिलकर सामूहिक रूप से अश्लील एमएमएस बनाया था। यह एमएमएस आरोपियों ने अपने अन्य साथियों को भेज दिया था। पुलिस ने छात्रा की शिकायत पर आरोपियों पर मामला दर्ज कर लिया था। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को सजा भी हुई।

छात्रों ले लूटा नशे में लूट

हबीबगंज में छात्रों ले लूटा पिकअपवैन
मनोज राठौर
ई-5/1, अरेरा कॉलोनी में रहने वाले बिल्डर अनिल क्षत्रपाल की कंस्टक्शन कंपनी है। उनकी कंपनी में ईश्वर साल्वे नामक युवक काम करता है। ईश्वर उनका बफादार कर्मचारियों में से एक है, जो कई सालों से उनके साथ काम कर रहा है।साल्वे तीन अगस्त 2011 की रात करीब साढ़े आठ बजे कंपनी की पिकअप वैन (एमपी 04 जीए 1275) एमपी नगर से रिपयेर कराकर घर की तरफ लौट रहा था। इस दौरान अरेरा कॉलोनी चौराहे पर बाइक सवार तीन युवकों ने उनकी वैन को रोक लिया। साल्वे ने समझा की युवकों को कोई मदद चाहिए है, इसलिए वह बिना सोचे-समझे वैन से नीचे उतर गए। मगर, यह गलती उन पर भारी पड़ी। युवकों ने उन्हें वैन में जबरिया बैठाया और एक युवक वैन को ड्राइव करने लगा। इसके बाद उन्होंने साल्वे की चलती वैन में पिटाई की और जहांगीराबाद स्थित कब्रस्तान के पास साल्वे को नीचे उतारकर उनसे सात सौ रुपए नकदी व एक मोबाइल फोन छीन लिया। इसके बाद तीनों युवक वैन को लेकर फरार हो गए। तीनों आरोपी नशे की हालत में थे। उन्होंने नशे में पिकअप वैन को लूट लिया।
चंगुल से निकलकर थाने पहुंचा साल्वे: आरोपियों के चंगुल से निकलने के बाद साल्वे एमपी नगर थाने पहुंचा। वहां उसने पुलिस को अपने साथ हुई लूट की घटना के बारे में बताया। इसके बाद एमपी नगर पुलिस ने लूट की घटना को शहर के अन्य थानों को वायरलैस सेट के माध्यम से बताया। इधर, सूचना मिलते ही पुलिस ने नाकेबंदी कर आरोपियों को पकड़ लिया। आरोपी की पहचान रिवेरा टाउन निवासी शैलेंद्र सिंह यादव (21), भदभदा रोड निवासी धीरज त्रिपाठी(21) और कोलार रोड निवासी दीपक शर्मा (22) के रूप में हुई।
ऐसे धराए आरोपी: हबीबगंज पुलिस को पता चला कि आरोपी होशंगाबाद की ओर भागने की कोशिश कर रहे थे। इस पर पुलिस की एक टीम ने उनका पीछा किया। इस दौरान बासेवनिया की ओर से पुलिस की गाड़ी को अपनी ओर आता देख आरोपियों ने वैन को हबीबगंज नाके की ओर मोड़ दिया। हालांकि, आरोपियों की किस्मत खराब थी, क्योंकि फाटक लगा हुआ था और ट्रेन आने वाली थी। इसके चलते उन्होंने फाटक के पास वैन खड़ी की और रेलवे पटरी को क्रास कर हबीबगंज रेलवे स्टेशन की ओर पैदल भागने लगे। इस दौरान पटरी को पार करते समय ट्रेन आ गई और वे ट्रेन की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए। उधर, पुलिस ने फाटक के दूसरे तरह सख्त घेराबंदी कर दी थी। हबीबगंज रेलवे स्टेशन की तरफ जैसे ही आरोपी भागे, वैसे ही पुलिस ने उनका पीछा करना शुरू कर दिया। अपनी ओर पुलिस को आता देख आरोपी अरेरा कॉलोनी की ओर भागने लगे। इस दौरान पुलिस ने आरोपी शैलेंद्र को दबोच लिया था, जबकि दीपक ई-3 अरेरा कॉलोनी निवासी सक्सेना के घर की छत पर चढ़ गया और धीरज गर्ल्स हॉस्टल परिसर में चला गया। पुलिस ने उन्हें भी घेराबंदी कर दबोच लिया था। पुलिस ने आरोपियों वैन और नकदी बरामद कर ली।
छात्र थे आरोपी: तीनों आरोपी का परिवारिक स्थिति ठीक थी। सभी खाते-पीते घर के थे। इतना ही नहीं तीनों आरोपी पढ़ाई भी कर रहे थे। इनमें धीरज और शैलेंद्र इंजीनियर के छात्र हैं, जबकि दीपक एक निजी कॉलेज से बैचलर डिग्री कर रहा है। पुलिस की गिरफ्त में आए तीनों आरोपियों ने हबीबगंज थाने में साल्वे से माफी भी मांगी और उनकों गाड़ी लूटने का हजार्ना देने की बात भी कही, लेकिन साल्वे ने उन्हें माफ नहीं किया।

शराब के लिए पहले लूट, बाद में हत्या

शराब के नशे में चार युवक इतने अधिक डूब गए कि उन्होंने पहले एक युवक के साथ लूटपाट की और बाद में उसकी चाकू से नृशंस हत्या कर दी। पुलिस ने तीन आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि कहानी लिखे जाने तक एक आरोपी फरार था...
मनोज राठौर
अशोका गार्डन थाने में नए-नए आए थाना प्रभारी आरआर पाटीदार छह जुलाई 2011की रात 11.00 बजे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा ले रहे थे। इस बीच थाने से उनके पास फोन आया कि औद्योगिकी क्षेत्र स्थित एवन ब्रेड फैक्टरी के पास कुछ लोगों ने एक युवक पर चाकू से हमला कर दिया है। घायल युवक को 108 एंबुलेंस से हमीदिया अस्पताल भेज दिया गया है। इतना सुनने के बाद पाटीदार बिना वक्त गवाए घटना स्थल पर पहुंच गए।उन्होंने घटना स्थल पर घायल युवक की जानकारी एकत्रित करनी चाही, तो उनके पास दोबारा एक सिपाही का फोन आया। उसने बताया कि साहब, घायल युवक की मौत हो गई है। अब यह मामला हत्या के प्रयास का नहीं, बल्कि हत्या का हो गया है। यह जानकारी मिलते ही पाटीदार ने पुलिस की एक टीम बनाई और मृतक की शिनाख्त करने के लिए कहा। टीआई का निर्देश का पालन करते हुए टीम एवन ब्रेड फैक्टरी पहुंची। वहां टीम ने कर्मचारियों और अधिकारियों को मृतक के हुलिए की जानकारी दी। पूछताछ के दौरान कर्मचारियों ने बताया कि उक्त हुलिए का युवक उनकी फैक्टरी में काम करता है। इसके बाद पुलिस के साथ कुछ कर्मचारी घटना स्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने मृतक की साइकल को देखकर उसकी पहचान फैक्टरी में काम करने वाले सुभाष कॉलोनी निवासी आसिफ उर्फ इस्माइल पुत्र सुलेमान (22) के रूप में की। पुलिस ने मृतक की शिनाख्त होने पर राहत की सांस तो ली, लेकिन अब पुलिस के लिए हत्यारों का सुराग लगाने सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके चलते पुलिस की अलग-अलग टीमों ने आसिफ के पड़ोसी, दोस्त और फैक्टरी में काम करने वाले लोगों से पूछताछ की। सप्ताहभर चली पूछताछ के बाद भी पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची।
ऐसे की हत्या: घटना वाले दिन हुआ यूं कि आसिफ ठीक 11 बजे फैक्टरी से काम निपटाने के बाद साइकल से घर लौट रहा था। इस दौरान फैक्टरी से थोड़ी दूरी पर उसकी साइकल चार युवकों ने रोक ली। चारों युवक नशे की हालत में धुत थे। उन्होंने आसिफ से रुपए की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इस बीच आसिफ ने कुछ समय तक आरोपियों का सामना भी किया, लेकिन एक युवक ने आसिफ की शर्ट से उसके ही हाथ-पैर बांध दिए और उसकी पेंट की जेब से करीब सात सौ रुपए, दो मोबाइल फोन निकाला। इसके बाद आरोपियों ने उसके पेट में चाकू घोंप दिया। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी भाग निकले और कलारी पर जाकर शराब खरीद ली।
क्राइम ब्रांच को मिला हत्यारों का सुराग: एएसपी एसएम वर्मा ने बताया कि 21 अगस्त को एक मुखबिर ने क्राइम ब्रांच को सूचना दी कि आसिफ की हत्या करने वाले आरोपी अशोका गार्डन स्थित सेमरा गेट के पास घूम रहे हैं। इस पर उन्होंने क्राइम ब्रांच और अशोका गार्डन पुलिस की एक संयुक्त टीम का गठन किया। उनके मार्ग दर्शन में उक्त टीम ने मौके पर जाकर घेराबंदी कर तीन आरोपियों को दबोच लिया। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी आनाकानी करने लगे, लेकिन सख्ती बरतने पर उन्होंने आसिफ से लूट और उसकी हत्या करना स्वीकार की। आरोपी की पहचान देशराज उर्फ भैया कुशवाह (27), सोनू शाक्य (23) और बुंदेल शाक्य (18) के रूप में हुई। सभी आरोपी सेमरा गेट, बाबू कॉलोनी के रहने वाले हैं। आरोपियों का एक साथी राजपाल फरार है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
शराब के लिए हत्या: घटना वाले दिन चारों आरोपियों ने देशी कलारी पर जमकर शराब पी। हालांकि, इस दौरान आरोपियों ने ओर अधिक शराब खरीदने के लिए अपनी-अपनी जेब टटोली, तो किसी के पास एक रुपया भी नहीं निकला। इस पर चारों ने रुपए के लिए लूट करने की योजना बनाई। वे नशे की हालत में थे और उनके सिर पर रुपए हासिल करने के लिए सिर्फ लूटपाट करने का जुनून सवार था। इस पर चारों युवक घूमते-फिरते हुए औद्योगिकी क्षेत्र स्थित एवन ब्रेड फैक्टरी के पास पहुंचे और अंधरे में किसी के आने का इंतजार करने लगे। इस दौरान आसिफ वहां से जैसे ही गुजरा, तो आरोपियों ने उसे रोक लिया। विरोध करने पर आरोपियों ने आसिफ के हाथ-पैर उसकी शर्ट से बांध दिए और लूटपाट करने के बाद उसकी चाकू से नृशंस हत्या कर दी। आरोपियों पर इक्कादुक्का मारपीट और अड़ीबाजी के मामले ही दर्ज हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया कि शराब के लिए रुपए नहीं मिलने पर उन्होंने आसिफ से जबरिया लूटपाट की और विरोध करने पर उसकी हत्या कर दी।
प्रेम प्रसंग से जोड़कर देखा मामला: अशोका गार्डन थाना पुलिस की एक टीम ने आसिफ के घर की तलाशी ली, तो वहां उन्हें एक युवती का फोटो मिला। फोटो देखने के बाद पुलिस मामले को प्रेम प्रसंग से जोड़कर देखने रही थी, लेकिन युवती का सुराग नहीं मिलने पर पुलिस की जांच फिर से ठंडे बस्ते में चली गई। पुलिस सप्ताहभर पहले जहां खड़ी थी, उसने खुद को वहीं पाया।

Wednesday, January 18, 2012

आर्थिक तंगी ने बनाया लुटेरा

मनोज राठौर
बरखेड़ा पठानी निवासी गोपीलाल मेहरा शाहजहांनाबाद स्थित रजिस्ट्रार आॅफिस में नौकरी करते हैं। वह रोजाना की तरह 15 जून 2011 को आॅफिस से पंजीयन शुल्क के 15 लाख 46 हजार 325 रुपए लेकर सुल्तानिया रोड स्थित स्टेट बैंक की शाखा में जमा करने के लिए जा रहे थे। बेनजीर गेट के सामने बाइक सवार तीन बदमाशों ने उन पर क्रिकेट बैट से जानलेवा हमला कर बाइक लूट ली। बदमाशों ने शाहजहांनाबाद क्षेत्र में बाइक को लावारिस हालत में पटक दिया और उसकी डिग्गी में रखे 15 लाख 46 हजार 325 निकाल लिए। इस मामले में एएसपी संतोष सिंह गौर ने गोपीलाल और उसके करीबियों पर शक दायर किया था। इसके चलते पुलिस ने उनके बेटे सहित अन्य लोगों से पूछताछ भी की, लेकिन कोई सुराग नहीं लगा। इसके बाद पुलिस की शक की सुई रजिस्ट्रार आॅफिस के कर्मचारियों पर आकर रूक गई। एएसपी गौर ने सभी कर्मचारियों का रिकार्ड निकाला और उसकी जांच पड़ताल की। पड़ताल में उन्हें पता चला कि स्थायी कर्मचारियों के अलावा भी कुछ लोग कभी-कभी आॅफिस में काम करने के लिए आते हैं। इस पर एएसपी ने अस्थायी कर्मचारियों की लिस्ट तैयार की और उन पर नजर रखने के लिए पुलिस की एक टीम बनाई। इस टीम ने सप्ताहभर के अंदर एएसपी को कुछ महत्वपूर्ण जानकारी लगाकर दी। यह जानकारी आरोपियों तक पहुंचने के लिए पर्याप्त थी। इसके बाद क्या था, एएसपी ने बिना वक्त गवांए लुटेरों को दबोच लिया।
आर्थिक तंगी के चलते लूट- पुलिस से ठोस सबूतों के आधार पर कबीटपुरा निवासी याकूब खान, उसके भांजे नासिर और जहांगीराबाद में रहने वाले दोस्त उबेश, शहजाद व आमिर को दबोच लिया। आरोपी याकूब और नासिर रजिस्ट्रार कार्यालय में बाइंडिंग का काम करते थे। इस दौरान उनका परिचय गोपीलाल से हो गया। उनका बाइंडिंग की कमाई से ठीक तरीके से गुजारा नहीं हो पा रहा था। वे आर्थिक तंगी से गुज रहे थे। इसके चलते ही याकूब ने गोपीलाल के साथ लूट करने की योजना बनाई। उसे पता था कि गोपीलाल रोजाना लाखों रुपए लेकर बैंक में जाम करना चाहता था। उसने अपनी लूट की योजाना में भांजे नासिर, दोस्त उबेश, शहजाद और आमिर को शामिल किया।
ऐसी की लूट- याकूब की योजना के मुताबिक उबेश, शहजाद और आमिर बाइक से बेनजरी गेट पहुंचे और पता पहुंचने के बहाने गोपीलाल को रोक लिया। जैसे ही वह रूके, वैसे ही आरोपियों ने क्रिकेट बैट से उन पर जानलेवा हमला कर दिया। इसके बाद आरोपी भागकर उवेश के घर पहुंचे और लूट की राशि को कचरे में छुपा दिया। इधर, घायल गोपीलाल को एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान होश आया। उन्होंने पुलिस को बताया था कि यदि आरोपी उनके सामने आ जाएगें, तो वह उन्हें पहचान लेंगे। घटना के चार दिन के बाद याकूब ने 307000, नासिर ने 407000, उबेश ने 407000, आमिर ने 407000 और शहजाद ने 18325 रुपए आपस में बांट लिए। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से लूट के रुपए से खरीदी गई एक बाइक और 12 लाख रुपए नकदी बरामद कर लिए ।बाइक खरीदी- उवेश ने लूट के रुपए में से एक लाख सात हजार रुपए की एक बाइक खरीद ली थी। वह नई बाइक को लेकर मोहल्ले में गया, तो कुछ लोगों पर उसे संदेह हुआ। इसकी जानकारी पुलिस को मिली, तो उस पर नजर रखी जाने लगी। इसके बाद पर्याप्त साक्ष्य एकत्र कर पुलिस ने उसे दबोच लिया।
पहचान के डर से दोस्तों का सहारा- याकूब ने पहचाने जाने की डर से अपने दोस्त उबेश, आमिर और शहजाद का सहारा लिया। उसे पता था कि यदि वह लूट की वारदात को अंजाम देगा, तो उसे गोपीलाल पहचान लेगा। इसके चलते वह भांजे नासिर के साथ बेनजीर गेट से थोड़ी दूरी पर छुप गया और गोपीलाल के आने पर साथियों को इशारा कर दिया।

छेड़छाड़ करने पर की हत्या

टीटी नगर में छेड़छाड़ के बाद हत्या का मामला
दोस्त की बहन के साथ छेड़छाड़ करना एक युवक को उस समय महंगा पड़ गया, जब उसने शराब के नशे में उसकी बहन के बारे में अपशब्द कह दिए। फिर क्या था, दोस्त ने दो सथियों के साथ मिलकर चाकू से उसकी गला रेतकर हत्या कर दी। अभी आरोपी सेंट्रल जेल में सजा काट रहे हैं...
मनोज राठौर
रोजाना की तरह टीटी नगर स्थित शास्त्री नगर निवासी मनोरमा पत्नी स्व. बीएल शर्मा (50) 17 जून 2011 की सुबह एमएलबी कॉलेज चली गर्इं। वह कॉलेज में बतौर लैब टेक्नीशियन हैं। घर पर उनका इकलौता बेटा जीत शर्मा (21) था, जबकि उनकी बेटी बीबीए की पढ़ाई कर रही है। वह शुरू से शास्त्री नगर स्थित अपने दादा-दादी के पास रहती थी। इस दौरान मनोरमा भले ही लैब में विद्यार्थियों के साथ काम कर रही हों, लेकिन उनका मन घर पर लगा हुआ था। वह रोजाना की तरह कॉलेज से ससुराल न जाकर शाम छह बजे सीधे घर चली आईं। वह घर के दृश्य को देखकर थोड़े देर के लिए चौंक गई। उन्होंने देखा कि बेटा जीत, उसके दोस्त सोनू और अरविंद बरामदा बगीचे के फर्श की धुलाई कर रहे है। मनोरमा ने जीत से पूछा कि यह साफ-सफाई क्यों की जा रही है। इस पर जीत चौंक गया और उसने तोतली जवान से कहा कि कुछ नहीं फर्श गंदा हो रहा था, इसलिए उसे साफ कर दिया। इसके बाद जीत साथियों के साथ कन्नी काट कर घर से बाहर चला गया। अगले दिन उसने दादा-दादी को अपने घर के गैरेज की चाबी दी और रफूचक्कर हो गया।
आखिर क्या हुआ था उस दिन
17 जून की सुबह मनोरमा के कॉलेज जाने के बाद जीत ने दोस्त दिनेश मीणा, सोनू और अरविंद को घर पर बुलाया। घर पर बैठकर उन्होंने जमकर शराब पी। इस दौरान जीत और दिनेश के बीच कहासुनी हो गई। विवाद इतना बड़ा की, दिनेश ने गुस्से में जीत के हाथ और पैर पर बीयर की बोतल मार दी। इस पर आग बबुला हुए जीत ने सोनू और अरविंद के साथ मिलकर नशे में धुत दिनेश की चाकू से गोंदकर हत्या कर दी। उन्होंने जब तक दिनेश पर हमला किया, तब तक उसकी जान नहीं निकल गई। पहले उन्होंने लाश को घर के बाहर किसी सूनसान इलाके में ठिकाने की योजना बनाई, लेकिन कॉलोनी में आवाजाही तेज होने के कारण उनकी योजना फेल हो गई। इसके बाद जीत ने सोनू और अरविंद की सहायत से लाश को गैरेज में रखे लोहे के ड्रम में छुपा दिया था।
इसलिए की हत्या
घटना के अगले दिन जीत गैरेज की चाबी दादा-दादी को देकर दोस्त सोनू के साथ ग्वालियर आ गया था। वह छह दिनों तक ग्वालियर में रूके, लेकिन मुखबिर की सूचना पर क्राइम स्क्वॉड ने दोनों आरोपियों को दबोच लिया। प्रारंभिक पूछताछ में वे आनाकानी करने लगे, लेकिन एएसपी अमित सांघी के द्वारा बरती गई सख्ती के बाद उन्होनें दिनेश की हत्या करना स्वीकार की। जीत ने पुलिस को बताया कि दिनेश कॉलेज आते-जाते उसकी बहन को रास्ते में रोककर छेड़ता था। यह बात उसके पता चली, तो उसने दिनेश को सबक सिखाने की ठान ली। घटना वाले दिन भी घर पर शराब पीने के दौरान दिनेश ने उसकी बहन के बारे में अपशब्द कह दिए थे। उधर, जीत पहले से दिनेश से नाराज चल रहा था। फिर क्या था, जीत का दिनेश से विवाद हो गया। विवाद बढ़ने पर उसने सोनू और अरविंद के साथ मिलकर दिनेश की हत्या कर दी।
दिनेश की चाय की दुकान
गीताजंलि निवासी दिनेश (23) पीएंडटी स्थित भाई प्रकाश के साथ चाय की दुकान संभालता था। वह गत 17 जून को घर नहीं लौटा था, उसके परिजन ने कमला नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसे आखरी बार प्रकाश ने जीत, सोनू और उसके भाई अरविंद के साथ देखा था। इसके चलते वह उसे ढूंढते हुए जीत के घर पहुंचा। वहां पहले से भीड़ लगी हुई थी, क्योंकि पुलिस ने पड़ोसियों को बदबू आने की शिकायत पर गैरेज में ड्रम के अंदर रखी दिनेश की लाश बरामद कर ली थी। भाई प्रकाश ने बताया कि जीत, सोनू और दिनेश शराब पीने के आदी थी। साथ में शराब पीने के बाद पूर्व में भी उनके बीच कई बार झगड़ा हो चुका था।
जीत कर चुका है, आत्महत्या का प्रयास
टीटी नगर पुलिस के अनुसार जीत आवारा किस्म का लड़का था, पढ़ाई में भी उसका मन नहीं लगाता था। दसवीं में तीन मर्तबा फेल हो चुका है, इस बार भी उसे सप्लिमेंट्री आई थी। वह अक्सर शराब पीकर चौराहे पर लोगों से विवाद किया करता था। बीते साल उसने फिनाइल पीकर आत्महत्या की कोशिश की थी।

प्रेमी निकला दगाबाज

शाहपुरा में ब्यूटीशियन की हत्या का मामला

मनोज राठौर

गोविंदपुरा में रहने वाली 39 वर्षीय पूजा (परिवर्तित नाम) ने 18 साल पहले शाहपुरा के गुलमोहर कॉलोनी निवासी राजेश नायक से लव मैरिज की थी। उनके दो बेटे हैं। पूजा पेशे से ब्यूटीशियन थी और वह आउटडोर जाकर काम करती थी। पूजा अपने परिवार के साथ बहद खुश थी। मगर, उसकी जिंदगी उस समय जहर खुल गया, जब उसकी मुलाकात पुराने मित्र अजय जेम्स से हुई। वह पति से चोरी-छुपे अजय से मिलने जाने लगी, लेकिन उस पता नहीं था कि उसका दोस्त ही उसकी जान का दुश्मन बन जाएगा। 18 सितंबर, दोपहर के डेढ़ बज रहे थे। पूजा अजय के गोविंदपुरा स्थित घर पर थी। किसी बात को लेकर उसकी अजय से कहासुनी हो गई। अजय नशे में था। उनके बीच बात इतनी बढ़ी कि उसने पूजा का गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी पूजा की लाश को बोरे में बंद कर रायसेन क्षेत्र में फेंक आया था। हालांकि, पुलिस पूजा के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल के जरिए अजय तक पहुंची और पूरे घटनाक्रम से पर्दाफाश किया।

पार्टी में जाने का कहकर निकली थी पूजा- पूजा 18 सितंबर 2011, दोपहर एक बजे घर में परिजन से एक पार्टी में जाने का कहकर निकली थी। वह अपने साथ एक्टिवा एमपी 20 जेडी 4443 ले गर्इं थी। जब देर शाम तक पूजा घर नहीं लौटी, तो उसके पति राजेश ने उसकी रिश्तेदारों में तलाश की। देर रात तक पूजा का सुराग नहीं लगा, तो राजेश ने शाहपुरा थाने में जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई। उधर, थाना प्रभारी जीएस जगैत ने मामले को गंभीरता लिया और पूजा के समय रहते पूजा के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवाई। उन्हें कॉल डिटेल में पता चला कि पूजा की अक्कसर अजय से बात होती थी। घटना वाले दिन भी उसकी बात हुई थी। वहीं दूसरी ओर राजेश ने भी अजय पर संदेह जाहिर किया था। सो, पुलिस ने अजय के घर पर दबिश दी, लेकिन उसके घर पर लगातार दो दिन तक ताला लगा मिला। इस पर पुलिस की टीम उसकी निगरानी करने लगी। पुलिस ने उसे 22 सितंबर को हिरासत में ले लिया और उसने प्रारंभिक पूछताछ में पूजा की हत्या करना स्वीकार कर ली।

ऐसे की हत्या- गोविंदपुरा, सी-सेक्टर निवासी अजय ने थाना प्रभारी जगैत को बताया कि घटना वाले दिन पूजा उसके घर आई थी। शराब के नशे में धुत अजय ने उससे कुछ देर और ठहरने के लिए कहा। उसके द्वारा इंकार सुनकर अजय आग-बबुला हो गया। इसके बाद उसने चुन्नी से पूजा का गला घोटकर उसकी हत्या कर दी। इतना ही नहीं उसने अपने परिचित वकील को फोन लगाकर घटना की जानकारी दी। इस पर वकील ने अजय का साथ दिया और उसे लाश को कार से ठिकाने की सलाह दी। उसने लाश को ठिकाने लगाने के लिए गैरेज से अपनी कार निकाली, तो उसका अलटीनेटर खराब हो गया। इसे सुधरने के लिए वह कार को एक मैकेनिक को देकर आ गया। इस दौरान अजय ने रातभर पूजा की लाश के नजदीक बैठकर शराब पी। अगले दिन कार सुधरने के बाद उसने पूजा की लाश एक बोरी में बंद की और उसे रायसेन रोड पर फेंक आया। अजय इतना शातिर था कि उसने पूजा की एक्टिवा भी एमपी नगर क्षेत्र में खड़ी कर दी थी, ताकि किसी को उस पर शक नहीं हो। पुलिस ने आरोपी की कार, पूजा की एक्टिवा, मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है।

अजय ने दिया सहारा- अजय व पूजा बचपन के दोस्त हैं। उन्होंने एक साथ कॉलेज और स्कूल की पढ़ाई को पूरा किया। इतना ही नहीं वे दोनों गोविंदपुरा सी-सेक्टर में ही रहते थे। बताया गया है कि इस दौरान उनके बीच कुछ समय तक प्रेमप्रसंग भी चला। हालांकि, इसी दरमियान पूजा की जिंदगी में राजेश नामक शख्स आ गया और उसने अजय का साथ छोड़कर उससे प्रेम विवाह कर लिया। उधर कुछ साल पहले राजेश के एक सड़क हादसे में दोनों पैर खराब हो गए थे। इस बीच वर्ष 2001 में उसकी मुलाकात पुराने मित्र एंव पूर्व प्रेमी अजय से हो गई। फिर क्या था, उन्हें कॉलेज के दिन याद आने लगे और पूजा आए-दिन अजय के घर जाने लगी। उनके बीच सालों पहले बनी दूरियां अब नजकियों में परिवर्तित हो गई थी। उसकी जिंदगी में अजय किसी सहारे से कम नहीं था।

नशे में धुत रहता अजय- अजय एक प्राइवेट सिक्युरिटी एजेंसी में नौकरी करता है। वह 24 घंटे नशे में धुत रहता है। इसके चलते ही कुछ महीनों पहले उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर आगरा चली गई। उसकी पत्नी को अजय और पूजा के बीच के संबंधों की जानकारी भी थी।

Thursday, January 12, 2012

अवैध संबंध ने ली जान

मनोज राठौर

सात दिसंबर 2011 की सुबह-सुबह हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाली मोना (परिवर्तित नाम) गौतम नगर थाने पहुंची। इधर, थाने में मौजूद पुलिसकर्मी भी महिला को देखकर समझ गए कि कोई गंभीर बात है, इसलिए महिला सुबह-सुबह खुद आई है। महिला ने पुलिस कर्मियों को बताया कि मेरे पति सुरेश विश्वकर्मा (40) कल से गायब है। वह मुझे घर पर छोड़ने के बाद थोड़ी देर में आने का कहकर कहीं गए थे। इसके बाद घर लौटकर नहीं आए। पुलिस ने तत्काल महिला की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज कर ली और वायरलैस सेट के माध्यम से शहर के सभी थानों में सुरेश के लापता होने की सूचना प्रेषित कर दी।रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद मोना घर के लिए निकल गई। वह घर भी नहीं पहुंची होगी की पुलिस को सूचना मिली कि नरियलखेड़ा स्थित गणेश नगर में सड़क किनारे खून के निशान और एक व्यक्ति के हाथ की एक अंगुली कटी पड़ी हुई है। इस पर थाने से टीआई को घटना की जानकारी देने के बाद पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और उसने अंगुली को बरामद कर लिया। पुलिस आसपास पड़े खून को देखकर समझ गई कि जहां किसी पर जानलेवा हमला किया गया है। पुलिस खून के धब्बों का पीछा करते हुए गणेश नगर में बने एक सेफ्टिक टैंक तक पहुंच गई। शंका होने पुलिस ने टैंक में छानबीन करने के लिए नगर निगम का अमला बुलवा लिया। कर्मचारियों ने टैंक की सफाई की, तो उसमें एक युवक की लाश पड़ी हुई थी। लाश को देखकर पुलिस का शक गहरा गया और उसने तत्काल मौके पर थाने में पति के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराने वाली मोना को बुलवा लिया। मोना ने लाश देखी, तो उसका कलेजा मुंह को आ गया। उसने पुलिस को बताया कि उक्त युवक उसका पति है, जो कल रात से लापता था।

अवैध संबंध ने ली जान

सुरेश से पेशे से आर्किटेक्ट था। इसके साथ-साथ वह पैसे को ब्याज पर देने का कारोबार भी करता था। उसके पास रुपयों की कमी नहीं थी। घर में खुबसूरत पत्नी और भरापूरा परिवार था। उसे किसी बात की कमी नहीं थी, लेकिन शराब और जुए की लत उसे बर्बादी की ओर ले जा रही थी। पति ने उसे कई बार समझाया, लेकिन सुरेश अपनी जिंदगी में जी रहा था। डेढ़ साल पहले उसकी अमीरी का फायदा उसकी कॉलोनी से लगे मोहल्ले में रहने वाले अर्जुन अहिरवान ने उठाया। उसने सुरेश से मेल-जोल बढ़ा लिया। इसके बाद सुरेश शराब के अड्डों पर बैठने के वजाए अर्जुन के घर पर ही शराब पीने लगा। दोनों रोजाना घर पर बैठकर शराब पीते थे। इसी दौरान सुरेश की नजर अर्जुन की खूबसुरत पत्नी पर पड़ी। वह शराब पीने के बहाने अर्जुन के घर आता और उसकी पत्नी पर बुरी नजर रखता। इससे अर्जुन को कोई फर्क नहीं पड़ा, क्योंकि उसे रोजाना फ्री की शराब मिल रही थी। इधर, अर्जुन की पत्नी सुरेश की निगाहों की पढ़ चुकी थी। सो, वह उससे नजरें चुराने लगी। सुरेश ने एक दिन मौका पाकर उसके सामने अपने प्यार का इजहार कर दिया। पहले तो वह थोड़े देर के लिए डर गई, लेकिन बाद उसने आंखों से सुरेश के प्यार को हरि झंठी दे दी। इसके बाद क्या था, दोनों छुप-छुपकर एक-दूसरे से मिलने लगे। वह अर्जुन की गैर-मौजूदगी में उसके घर घंटों रूकने लगा। इस दौरान उसने अर्जुन की पत्नी से अवैध संबंध स्थापित कर लिए थे। अवैध संबंध का सिलसिला करीब डेढ़ साल तक चला, लेकिन अर्जुन की बेटी ने जवानी की दहलीज पर कदम रखा, तो उसने सुरेश के घर पर आने का विरोध करने लगी। उसे सुरेश का घर आना और घंटों उसकी मां के साथ कमरें में रहना पसंद नहीं था।

ओर कर दी हत्या

उधर, बेटी के विरोध को देखते हुए अर्जुन ने सुरेश का घर आना बंद कर दिया। इससे सुरेश नाराज होगा और उसने खुली चुनौती देते हुए अर्जुन के घर के बाहर हंगामा करना शुरू कर दिया। इसी बात को लेकर गणेश चर्तुर्थी के दिान अर्जुन और सुरेश के बीच झगड़ा हुआ था। हालांकि, रहवासियों के हस्ताक्षेप के बाद मामला शांत हो गया था। इस झगड़े के बाद से अर्जुन ने तय किया कि वह एक न एक दिन सुरेश की जान ले लेगा। छह दिसंबर की रात शराब के नशे में सुरेश अर्जुन के घर पहुंचा। वहां अर्जुन की अपनी पत्नी और बेटी के साथ बैठकर बातें कर रहा था। सुरेश ने वहां पहुंचते ही अर्जुन को जोर से आवाज लगाई, लेकिन अर्जुन ने दरवाजे खोलने से मना कर दिया। इससे नाराज सुरेश ने जोरजोर से दरवाजा खटखटाया और उसकी पत्नी के बारे में अनाप-शनाप बोलने लगा। इस दौरान योजना के तहत अर्जुन ने फोन कर अपने साले राजेश, अनिल, अरुण और तरुण को घर बुला लिया। इसके बाद उन्होंने सुरेश पर चाकू से हमला कर दिया और उसकी जान ले ली। हत्या के बाद आरोपियों ने लाश छुपाने की गरज से लाश गणेश नगर स्थित सेफ्टिक टैंक में डाल दिया। घटना के बाद पांचों आरोपी इलाके में ही रहे और अपने-अपने काम करने में लग गए, जैसे कुछ हुआ ही नहीं, लेकिन उनकी एक गलती ने उनकी इस योजना पर पानी फेर दिया। जिस स्थान पर अर्जुन ने अपने साथियों के साथ मिलकर सुरेश की हत्या की थी, उस जगह खून के धब्बों के साथ ही सुरेश के हाथ की एक अंगुली कटकर गिर गई थी। इस पर उनका ध्यान नहीं गया था।

पत्नी को घर छोड़कर गया था सुरेश

सुरेश घटना की रात करीब नौ बजे अपनी पत्नी के साथ मंदिर गया। वहां से लौटने के बाद उसने अपनी पत्नी को घर छोड़ा और कुद देर बाद घर पर वापस आने का कहकर निकल गया। सुरेश देर रात तक घर लौटता था, इसलिए उसकी पत्नी ने उसकी ज्यादा चिंता नहीं की। मगर, सुबह जब पति घर नहीं पहुंचा, तो उसे चिंता सताने लगी। उसने पहले फोन पर अपने रिश्तेदारों से उनकी जानकारी ली, लेकिन सुरेश का सुराग नहीं लगा, तो उन्होंने थाने में आकर उनके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई।

Tuesday, October 18, 2011

बच्चों के लिए बना हत्यारा

(चीफ मैनेजर की हत्या का मामला)

मनोज राठौर

25 सितंबर 2011 को शाम 7.30 बज रहे थे। हबीबगंज स्थित शालीमार इंक्लेव कॉलोनी में रोजाना की तरह चहल-पहले थी। कई लोग घर के बाहर टहल रहे, तो कई लोग झुंड बनाकर इधर-उधर गप्पे लगा रहे थे। इस दौरान पंजाब एंड सिंध बैंक के चीफ मैनेजर एके नागपाल (52) कॉलोनी स्थित डायमंड ब्लाक-15 के फर्स्ट फ्लोन, फ्लेट नंबर तीन पर पहुंचे। उन्होंने दरवाजे की हालत देखी, तो वह चकित रहे गए। दरवाजा का ताला टूटा हुआ था। वह जैसी दरवाजा खोलकर अंदर गए, तो उनका सामना एक बदमाश से हो गया। बदमाश की शर्ट के अंदर चोरी का सामान भरा हुआ था। आरोपी भागने की फिराक में था, लेकिन नागपाल ने उसे लपककर पकड़ लिया। बदमाश ने पहचाने जाने की डर पर चाकू से उन पर ताबड़तोड़ वार किए। इसके बाद आरोपी उन्हें घायल अवस्था में छोड़कर खाली हाथ ही भाग निकला। उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी। नागपाल मूल रूप से दिल्ली के रहने वाले थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटे और एक बेटी है। उनका बड़ा बेटा यूके में नौकरी करता है, जबकि छोटा बेटा वरूण और बेटी अपनी मां के साथ दिल्ली में रहते हैं।

बच्चों के जन्म दिन के लिए चोरी: नागपाल का हत्या गोविंदपुरा स्थित विकास नगर निवासी सुंदर उर्फ शैलेंद्र यादव (32) ने की थी। उसने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल किया और उसने जो कुछ बताया, उसको सुनकर एएसपी राजेश चंदेल, सीएसपी राजेश सिंह भदौरिया और हबीबगंज टीआई सुरेश दामले चकित रह गए। आरोपी सुंदर ने बताया कि उसके दो जुड़वा बच्चे हैं, जिसका जन्मदिन 27 सितंबर को था। उसके पास बच्चों का जन्मदिन मानने के लिए रुपए नहीं थे। साथ ही वकील को पेशी के लिए पांच हजार रुपए देना थे। उसकी तमन्ना था कि वह जन्मदिन के मौके पर अपने दोनों बच्चों को नए कपड़े खरीदकर दे और उनका धूम-धाम से जन्मदिन बनाए। लेकिन उसके सारे अरमान उसकी एक हरकत की वजह से पानी की तरहा बह गए। वह बच्चों के जन्मदिन के लिए जिस घर में चोरी करने गया था, वहीं उसने घर के मालिक नागपाल की चाकू से गोदकर हत्या कर दी।

भागने की फिराक में था आरोपी: सुंदर शाम करीब सात बजे मैनेजर के घर का ताला तोड़कर अंदर दाखिल हुआ। वह चोरी का सामान शर्ट में भरकर घर से बाहर निकलने ही फिराक में था। इतने में नागपाल ने दरवाजा खोल दिया। आरोपी उन्हें देखकर भागने की कोशिश करने लगा, लेकिन उन्होंने उसे पकड़ लिया। उनका आरोपी से करीब 15 मिनट तक संघर्ष भी हुआ। इस बीच उसने श्री नागपाल पर चाकू से वार किए और उन्हें घसीटता हुए सीढ़ियों तक ले गया। हालांकि, श्री नागपाल के पड़ोसियों के शोर मचाने पर आरोपी चाकू लहराते हुए भाग निकले में सफल हो गया।

ऐसे पकड़ाया हत्यारा: घटना स्थल पर पुलिस को भविष्य निधी कार्यालय में पदस्थ एक ड्राइवर का आईकार्ड और अदालत में होने वाली पेशी की एक पर्ची मिली। इसी आधार पर पुलिस ने अशोका गार्डन क्षेत्र से गोविंदपुरा स्थित विकास नगर निवासी सुंदर उर्फ शैलेंद्र यादव (32) को गिरफ्तार कर लिया। वह 26 सितंबर की सुबह भागने की फिराक में था। प्रारंभिक पूछताछ में वह आनाकानी करने लगा, लेकिन शालीमार इंक्लेव के गार्ड ने उसकी पहचान कर ली। इसके बाद उसने मैनेजर की हत्या करना स्वीकार की। कुछ सालों पहले सुंदर भविष्य निधी कार्यालय में ड्राइवर था, लेकिन उसे करीब दो साल पहले सस्पेंड कर दिया गया था। नौकरी के दौरान ही आरोपी कई बार एक अधिकारी के साथ नागपाल के घर गया था। तभी से वह नागपाल को जानता था। उपुलिस ने उसके पास से हत्या में प्रयोग किए गए चाकू और खून लगी शर्ट बरामद कर ली है।

डॉटर-डे पर दी थी बेटी को बधाई: घटना वाली दोपहर करीब चार बजे नागपाल ने अपने छोटे बेटे वरूण को फोन लगाया। फोन पर उन्होंने सबसे पहले अपनी छोटी बेटी को डॉटर-डे के अवसर पर बधाई दी और उसकी लंबी उम्र की मनोकामना की। वरूण ने पिता से भोपाल के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि भोपाल बहुत अच्छा है और यहां रहते हुए ढाई साल कब बीत गए पता ही नहीं चला। उन्होंने दिल्ली आने की इच्छा भी जाहिर की और वरूण से कहा कि वह इसी साल रिटायर्डमेंट के बाद दिल्ली आएंगे।

चाकू से डर गए सिक्युरिटी गार्ड: नागपाल के पड़ोसियों के शोर मचाने पर भाग रहे आरोपी सुंदर को कॉलोनी की एक युवती ने पकड़ लिया, लेकिन वह थोड़ी देर बाद ही उसे धक्का देकर मेन गेट की ओर भागने लगा। इधर, आरोपी को मेन गेट की ओर आता देख सुरक्षा गार्ड बाबूलाल पटेल, रेवती रमन मिश्रा और चिंतामणी ने उसे दबोच लिया। वे उसे गार्ड रूम के पास लेकर आ रहे थे, इसी बीच वह रास्ते में जमीन पर लेट गया। सुरक्षा कर्मियों ने उसे उठाने की कोशिश की, तो उसने अचानक पीठ के पीछे छुपाए एक चाकू को निकाला और उन पर हमला करने लगा। इस पर तीनों गार्ड जैसे ही पीछे हटे, वैसे ही वह भाग निकला।

आरोपी ने तोड़े दो ताले : नागपाल के घर के दरवाजे में दो गेट लगे हैं। एक लोहे की जाली का है, जबकि दूसरा लकड़ी का। आरोपी नागपाल के घर में चोरी की नियत से दाखिल हुआ था। उसने घर में लगे लोहे की जाली वाले और लकड़ी वाले दरवाजे के ताला को एक के बाद एक कर तोड़ा। इसके बाद वह चोरी का सामान शर्ट में भरकर घर से निकलने की फिराक में था, लेकिन इसी बीच नागपाल आ गए।

Thursday, October 13, 2011

एक तरफा प्यार में बना हैवान

गोविंदपुरा में कार से छात्रा को कुचलने का मामला

'एक तरफा प्यार में पागल इंजीनियरिंग छात्र महेंद्र यादव को प्यार में हर बार नाकामी हाथ लगी, तो उसने प्रेमिका को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। उसने प्रेमिका सहित उसकी दो सहेलियों पर कार चढ़ा दी। इसमें एक छात्रा की मौत हो गई थी। पुलिस भी प्यार में हैवान बने महेंद्र को वांटेड घोषित कर चुकी है...

मनोज राठौर

करेली, नरसिंहपुर निवासी मोनिका (परिवर्तित नाम) आनंद नगर स्थित एक प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में बीई सिक्स सेमेस्टर की छात्रा है। वह सहपाठी छात्रा राधिका और सरोज के साथ गोविंदपुरा के संकल्प हॉस्टल में रहती थी। तीनों छात्राएं पढ़ाने में तेज थी और एक साथ कॉलेज आती और जाती थी। उन्हें पूरी क्लास में सिर्फ छात्र महेंद्र यादव से डर लगता था। इसी वजह से तीनों छात्राएं हर बार उससे कन्नी काटती थी।

इधर, महेंद्र मोनिका को पसंद करता था। वह उसके एक तरफा प्यार में दिवाना बन गया। वह वर्ष 2010 से उसे परेशान कर रहा था। महेंद्र को पता था कि मोनिका अपनी सहेली राधिका और सरोज के साथ हॉस्टल आती-जाती हैं। इस पर उसने उनके साथ दोस्ती बढ़ने की कोशिश की, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। वह एक तरफा प्यार में पागल हो गया था। सालभर में उसे हाव-भाव भी चेंज हो गए। उसने किसी तरह मोनिका को एक गुलाब का फूल देकर अपने प्यार का इजहार कर दिया, लेकिन मोनिका ने उसे समझाया कि वह नरसिंहपुर से पढ़ाई करने आई है। वह भी फालतू चीजों को छोड़कर अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे। मगर, महेंद्र कहां मानने वाला था। इसके बाद वह मोनिका और उसकी सहेलियों को कुछ ज्यादा ही परेशान करने लगा। वह अक्सर उनका रास्ता रोकता और उनसे बात करने की कोशिश करता। आखिरकार महेंद्र की हरकतों से परेशान होकर मोनिका ने उसकी शिकायत कॉलेज प्रबंधन से कर दी। इस पर प्रबंधन ने सख्त रवैया अपनाते हुए उसे एक सेमेस्टर के लिए सस्पेंड कर दिया। यह बात महेंद्र ने अपने परिजन को नहीं बताई। उसने दोस्तों से कहा कि यदि मोनिका उसकी नहीं हो सकी, तो किसी की नहीं होगी और उसने मोनिका को रास्ते से हटाने की कसम खा ली।

महेंद्र की हैवानियत-महेंद्र मूल रूप से ग्वालियर का रहने वाला है। उसके पिता रेलवे विभाग में अधिकारी हैं। वह बागसेवनिया के शंकराचार्य नगर स्थित किराए के मकान में अपनी मां के साथ रहता था। महेंद्र ने योजना के तहत 6-7 जून 2011 को दुर्गेश बिहार निवासी ट्रेवल्स संचालक अमित सिंह के पास गया। उसने खुद को 10 वीं फेल बताते हुए उनसे ड्रायवर की नौकरी मांगी। इस पर श्री सिंह ने दया दिखाते हुए उसे नौकरी पर रख लिया। इसके बाद वह 9 जून को ट्रेवल्स की कार क्रमांक एमपी 04 सीई 7792 को लेकर कॉलेज गया और वहां से इंटर्नल एग्जाम देकर कॉलेज की बस से घर जा रही छात्रा मोनिका का पीछा किया। बस ने दोपहर करीब दो बजे मोनिका और उसकी सहपाठी राधिका व सरोज को शक्ति नगर कॉम्प्लेक्स के पास उतारा। वहां से तीनों छात्राएं पैदल हॉस्टल की ओर जाने लगी, तो एक तरफा प्यार में पागल महेंद्र ने डीआरएम आॅफिस के सामने मोनिका पर कार चढ़ाने की कोशिश की। इस दौरान मोनिका बाल-बाल बच गई, लेकिन उसकी दोनों सहेली कार की चपेट में आ गई। इसके बाद भी उसका दिल नहीं भराया, तो उसने कार को रिवर्स कर मोनिका और उसकी सहेलियों पर तीन बार गाड़ी चढ़ाई।

कार छोड़कर भाग निकाला-घायल छात्राओं की चीख सुनने के बाद कुछ लोग उनकी मदद के लिए आगे आने लगे। यह देख महेंद्र मौके पर कार छोड़कर पैदल भाग निकला। लोगों ने कार के नीचे फंसी छात्रा सरोज को बाहर निकाला और सभी को निजी वाहनों से एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया, जहां करीब तीन दिन के इलाज के बाद मोनिका और राधिका को छुट्टी दे दी गई। वहीं सरोज की हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उसे पुराने शहर के एक प्राइवेट अस्पताल में रेफर कर दिया। वहां उसकी 29 जून 2011को इलाज के दौरान मौत हो गई।

महेंद्र वांटेड घोषित-पुलिस की दर्जनभर पार्टियों ने फरार महेंद्र की तलाश ग्वालियर, इंदौर, दिल्ली सहित दूसरे राज्यों में की, लेकिन महीनेभर बाद भी उसका सुराग नहीं लगा पाई। पुलिस हत्यारे महेंद्र पर पहले ही 15 हजार रुपए का इनाम घोषित कर चुकी है। वहीं महेंद्र को पकड़ने में नाकाम पुलिस ने गत तीन जून को उसे वांटेड घोषित कर दिया। उसके पोस्टर बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन सहित सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा कर दिए।क्या कसूर था मेरी बेटी का...अस्पताल में रीवा निवासी छात्रा सरोज के पिता रोते समय एक ही बात कह रहे थे कि मेरी बेटी आरती का क्या कसूर था, जो महेंद्र ने उसकी जान ले ली। वे तो अपनी सहेलियों के साथ कॉलेज से हॉस्टल लौट रही थी। उन्हें यकीन नहीं हो रहा था कि जिस बेटी को उन्होंने इंजीनियर बनाने के लिए भोपाल भेजा, आज उसकी लाश कंधों पर घर लेकर जाएंगे। अस्पताल में जिसने भी यह दृश्य देखा उसकी आंखे आंसूओं से भर आर्इं।

महेंद्र ने मां से छुपाई बात-तीनों छात्राओं को कार से रौंदने के बाद महेंद्र सीधा बागसेवनिया स्थित अपने किराए के कमरे पर पहुंचा। वहां उसने अपनी मां को बताया कि उसे पुलिस एक झूठे मामले में फंसाना चाहती है और उसे गिरफ्तार करने के लिए कभी-भी घर आ सकती है। इसके बाद वह मां को बाइक पर बैठाकर हबीबगंज रेलवे स्टेशन ले गया। उसने पार्किंग में बाइक पार्क की और ट्रेन से ग्वालियर चला गया। अगले दिन मीडिया में खबर देखकर उसके माता-पिता को बेटे की करतूत के बारे में पता चला। इससे पहले की महेंद्र के परिजन उसे डांट पाते, वह खुद ही घर छोड़कर कहीं फरार हो गया।

Wednesday, October 12, 2011

खुद के घर में कराई लूट

सट्टा खेलने की लत ऐसी लगी कि एक कलयुगी बेटे ने साथियों के जरिए अपने घर में लूट करवा दी। टीटी नगर पुलिस ने मामले की बारीकी से जांच कर आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
मनोज राठौर
5 जुलाई 2011 को एएसपी राजेश चंदेल पुलिस कंट्रोल रूम स्थित अपने केबिन में बैठकर जरूरी फाइलों में हस्ताक्षर कर रहे थे। इस दौरान उनके पास टीटी नगर सीएसपी अमित सक्सेना का फोन आया और उन्होंने बताया कि साउथ टीटी नगर में छह महीनें पहले सब इंजीनियर महमूद असन (56) के घर में हुई लूट के मामले में उनका एकलौता बेटा हबीब शामिल है। उसने ही सट्टा खेलने के चलते साथियों के साथ घर में लूट की साजिश रची। इस पर चंदेल ने बिना वक्त गवाए सभी आरोपियों को हिरासत में लेने के निर्देश दिए। इसके बाद सीएसपी ने टीटी नगर टीआई एसकेएस तोमर के साथ मिलकर एक के बाद एक सभी आरोपियों को दबोच लिया।
ऐसे की लूटपाट-एफ-44/23, साउथ टीटी नगर निवासी महमूद असन (56) सिंचाई विभाग में सब इंजीनियर हैं। वह घर में एकलौते बेटे हबीब और मानसिक रूप से विक्षिप्त पत्नी नगमा सुल्तान के साथ रहते हैं। हबीब प्रॉपर्टी का काम करता है। इसी साल तीन फरवरी को उनके घर चार युवक पहुंचे। वह खुद को हबीब का दोस्त बता रहे थे। इस पर महमूद ने उनसे कहा कि हबीब बाहर गया है, बाद में आकर उससे मिल लेना। इस दौरान एक युवक ने उनसे पीने के लिए पानी मांग लिया। महमूद भी क्या करते, उन्होंने बेटे के दोस्त समझकर घर के गेट का ताला खोला और उन्हें एक ग्लास में पानी भरकर दे दिया। इससे पहले की महमूद कुछ समझ पाते, चारों युवकों ने उनकी आंखों में मिर्ची झोंक दी और लोहे की पेटी में रखे नकदी 20 हजार रुपए, सोने के टॉप्स, नाक की लोंग , तीन चुड़ियां, दो मोबाइल फोन, एक एयरगन, चांदी की पायल सहित अन्य सामान लूट ले गए।
बेटा निकला साजिशकर्ता-इस मामले में सीएसपी अमित सक्सेना को शुरू से ही महमूद के बेटे हबीब पर शक था। इसके चलते ही उन्होंने पुलिस की एक टीम हबीब की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बना दी। पुलिस टीम ने महीनों की मेहनत के बाद हबीब के खिलाफ कई महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई। इसके बाद पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने लेकर आ गई। प्रारंभिक पूछताछ में वह आनाकानी करने लगा, लेकिन सख्ती बरतने पर उसने लूट की घटना से पर्दा हटाया। उसने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसने ही साथियों के साथ मिलकर अपने ही घर में लूट करने की साजिश रची। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर उसके नार्थ टीटी नगर में रहने वाले दोस्त रिंकू (परिवर्तित नाम), बाणगंगा निवासी अमजद व मोहन (परिवर्तित नाम) को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उनका अन्य साथी मंडीबमोरा निवासी समीर फरार है। पुलिस ने उस पर पांच-पांच हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। यह स्टोरी लिखे जाने तक आरोपी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया था।
नाबालिकों को लगाई हथकड़ी-पुलिस अधिकारियों ने नियमों का मजाक उड़ाते हुए नाबालिग रिंकू और मोहन को हथकड़ी लगाकर पुलिस कंट्रोल में पेश किया, जबकि बाल अपराधियों को मीडिया के सामने आना और हथकड़ी लगाकर उनके फोटो कराना गैर-कानूनी है।
इसलिए कराई लूट-हबीब ने इसी साल प्रॉपर्टी का काम शुरू किया था, लेकिन सट्टे की लत ने उसे बर्बाद कर दिया। उसे सट्टा खेलने के लिए 10 हजार रुपए की जरूरत थी। इसके चलते ही उसने दोस्तों से लूट की वारदात कराई। उसने खुद 10 हजार रुपए ले लिए और बाकी के रुपए उन्हें दे दिए। आरोपियों ने पूछताछ में यह भी बताया कि लूट की घटना के बाद उनकों रातों को नींद नहीं आती थी। वे पुलिस की गाड़ी को देखकर डर जाते थे।



Tuesday, October 04, 2011

'जिस्मानी शौक' ने ली जान

(एमआर हत्याकांड)

'ग्वालियर के एमआर को भोपाल में रहकर बच्चों से जिस्मानी शौक पूरा कराना महंगा पड़ा गया। यही बच्चे उनके लिए काल बन गए और एक दिन उनका गला घोंट कर हत्या कर दी। '
मनोज राठौर
ग्वालियर के लश्कर मोहल्ला निवासी उदय इंगले पुत्र एएस इंगले (47) एमआर (मेडिकल रिप्रजेंटेटिव) थे। वह दवाईयों की सप्लाई करने के सिलसिले में भोपाल आते-जाते रहते थे। वह पिछले दो-तीन सालों से भोपाल में आ रहे थे और लक्ष्मी टॉकीज स्थित आदर्श लॉज के कमरा नंबर 19 में रूकते थे। मग, उनकी कुछ गलत हरकत ही उनकी मौत का कारण बन गई। गत 30 जून 2011को इंगले लॉज के कमरा नंबर-19 में रूके थे। उनका लेपटॉप तो उनके पास था, लेकिन दिमाग ओर कहीं था। वह शाम करीब पांच बजे मार्केट का काम निपटाने के बाद लॉज पहुंचे थे कि उनके पास एक युवक का फोन आया और उसने उनसे मिलने की इच्छा जाहिर की। इसके बाद क्या था, एक के बाद एक तीन युवक इंगले के पास पहुंचे और योजना के तहत उनकी गला दबाकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद लक्ष्मी टॉकीज क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मौके पर पहुंचे एएसपी संतोष सिंह गौर ने शव को देखकर अंदाजा लगा लिया कि इंगले की हत्या उनके किसी परिचित या फिर मिलने-जुलने वाले व्यक्ति ने की है।
मोबाइल से मिला सुराग - एएसपी गौर को इंगले के कमरे से एक लेपटॉप, पन्नी में रखी चाय और तीन डिस्पोजल, दो मोबाइल फोन, एक चाकू, पर्स, बेल्ट सहित अन्य सामान मिला। उन्होंने घटना के अगले दिन शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे ग्वालियर से आए इंगले के परिजन को सौंप दिया। इस दौरान हनुमानगंज पुलिस ने इंगले के परिजन से बातचीत की, लेकिन उन्होंने किसी पर शक जाहिर नहीं किया और न ही किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी होना बताई। यह कहानी दिन-व-दिन उलझती जा रही थी और एमआर हत्याकांड एएसपी के लिए चुनौती बन गया। मगर, पुलिस स्टाफ को इंगले के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल से कुछ अहम सुराग मिल गए। यह बात एएसपी को पता चली, तो उन्होंने कॉल डिटेल को आधार बनाकर एक नए सिरे से मामले की जांच शुरू की। इस दौरान उन्हें पता चला कि घटना वाले दिन इंगले की आखरी बार बात दीप नामक युवक से हुई थी। इस पर दीप को प्रारंभिक पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया। वह पहले तो आनाकानी करने लगा, लेकिन सख्ती बरतने पर उसने एमआर की हत्या का राज खोल दिया।
क्या हुआ था घटना वाले दिन - घटना वाले दिन प्रोफेसर कॉलोनी निवासी दीप कुमार उर्फ दीपू के मोबाइल फोन से श्यामलाहिल्स में रहने वाले उसके दोस्त शाहरुख खान ने इंगले से बातचीत की। शाहरुख ने इंगले से कहा कि वह उससे मिलने चाहता है। इस पर इंगले ने उसे कमरे पर बुला लिया। वहां उनके बीच उधारी रुपए को लेकर कहासुनी हो गई। विवाद बढ़ने पर शाहरुख ने फोन कर दीपू और प्रोफेसर कॉलोनी में रहने वाले एक अन्य साथी शाहवर खान को बुला लिया। इसके बाद दीप कमरे के गेट पर पहरा देने लगा और शाहवर व शाहरुख ने इंगले पर चाकू से हमला किया, लेकिन चाकू दीवार से टकराकर तेढ़ा हो गया। इंगले दोनों छात्रों पर भारी पड़ रहे थे। इस दौरान शाहरुख ने हाथों से इंगले का गला और शाहवर ने मुंह दबा दिया। इंगले की हत्या करने के बाद घबराया शाहरुख कमरे की खिड़की से नीचे उतरते लगा, लेकिन पैर फिसलने से वह तीसरी मंजिल से नीचे गिर गया। कुछ देर के लिए वह सड़क पर बेहोशी की हालत में पड़ा रहा, लेकिन स्थानीय लोगों ने उसे पानी पिलाया, तो वह फुर्ती में जुमेराती मार्केट की ओर भाग निकला। वहीं उसके बाकी के साथी लॉज के रास्ते से नीचे उतरे और लक्ष्मी टॉकीज के पास खड़ी बाइक से भाग निकले।
यह शौक पड़ा महंगा - वैसे पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्ल्ड कप के दौरान शाहरुख ने इंगले को 10 हजार रुपए उधार दिए थे। हालांकि, रुपए देने में इंगले आनाकानी कर रहा था। इसके चलते शाहरुख ने साथियों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। उधर, पुलिस इस बात से भी इंकार नहीं कर रही है कि इंगले समलैगिंग थे। पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि इंगले पिछले दो-तीन सालों से भोपाल आ रहे थे। वह महीनें में तीन-चार दिन लॉज में रूकते। इतना ही नहीं वह भोपाल आने से पहले लॉज मैनेजर बाबूखान को फोन कर कमरा बुक करवा लेते थे। इंगले रोजाना सुबह-सुबह बड़े और छोटे तालाब में नहाने के लिए जाते थे। यह नहाना, तो सिर्फ उनका एक बहाना था। इस दौरान उनकी नजर कम उम्र के बच्चों पर रहती। यदि कोई बच्चों उनके साथ चलने के लिए तैयार हो जाता, तो वह उसे लॉज में लेकर आते और उसे लेपटॉप में लोड अश्लील फिल्म दिखाते। इसके बाद वह उसके शरीर पर हाथ फेरने लगते और बच्चे से ऐसा काम करने के लिए बोलते, जिसके लिए उन्हें शादी का इंतजार करना पड़ता है। मगर, बच्चे पैसों के लालच में इंगले की वासना शांत कर देते। ऐसा ही कुछ हो रहा था, शारुख के साथ।
अच्छे परिवार से तालुक - आरोपी छात्रों का तालुक अच्छे परिवार से है। शाहरूख के पिता मोहम्मद सलीम और दीप के पिता गिरिजा शंकर पीडब्ल्यूडी तथा शाहवर का बड़ा भाई सोहेल अपने पिता स्व. सलीम खान की जगह पर बोर्ड आॅफिस नौकरी करते हैं। शाहरूख पढ़ाई के साथ अदालत परिसर की पार्किंग में काम भी करता था।